रेलवे विकास प्राधिकरण को कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली ( 5 मार्च ): बहुप्रतीक्षित रेल डिवेलपमेंट अथॉरिटी के गठन को बुद्धवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। केंद सरकार की मंजूरी के बाद अब आरडीए रेल किराया-भाड़े के अलावा रेल सेवाओं की गुणवत्ता का मानक तय करेगा।


इसके साथ ही आरडीए रेलवे तथा ग्राहकों बीच कीमत व प्रतिस्पर्द्धा संबंधी मसलों का भी समाधान करेगा। सिफारिश करने वाला निकाय होने के कारण इसकी सिफारिशें मानने के लिए रेलवे बाध्य नहीं होगा।


खबरों के मुताबिक आरडीए एक स्वतंत्र नियामक होगा जिसमें अध्यक्ष के अलावा तीन अलग-अलग क्षेत्रों के तीन विशेषज्ञ सदस्य के रूप में लिए जाएंगे। इनका कार्यकाल पांच साल का होगा। अध्यक्ष की नियुक्ति निजी क्षेत्र से भी की जा सकती है, जिसका चयन कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। इसका गठन 50 करोड़ रुपये के कोष के साथ होगा।


कार्यकारी आदेश से आरडीए के गठन का फैसला इसे जल्दी स्थापित करने के मकसद से लिया गया है। बाद में इसे संसद में पेश कर विधेयक के रूप में लाने की अनुमति ली जाएगी। गुरुवार को रेलमंत्री सुरेश प्रभु पहले इस पर संसद में बयान देंगे और फिर प्रेस कान्फ्रेंस करेंगे।


इस अथॉरिटी के पास न सिर्फ यात्री और मालभाड़े में बढ़ोतरी की सिफारिश करने का अधिाकार होगा बल्कि यह यात्रियों को मिलने वाली सब्सिडी के मामले में भी फ्रेमवर्क बनाएगी। इसके अलावा ट्राई की तरह ही इस अथॉरिटी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह प्रतिस्पर्धा के लिए रेलवे और प्राइवेट प्लेयर्स को बराबरी के अवसर प्रदान करे।


इसके अलावा वह उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा करेगी। रेलवे को उम्मीद है कि इसी साल एक अगस्त से यह रेगुलेटरी अथॉरिटी काम करना शुरू कर देगी। हालांकि किराये में बढ़ोतरी के मामले में अथॉरिटी सिर्फ सिफारिश ही कर सकेगी यानी किराए बढ़ाने के मामले में अंतिम फैसला सरकार के पास ही रहेगा।