भारत में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर UNHRC ने दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली (11 सितंबर): भारत में रह रहे करीब 40,000 रोहिंग्या को वापस भेजने के फैसले पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है। मानवाधिकार परिषद ने इन्हें भारत से निकाले को गलत ठहराते हुए कहा, 'ऐसे वक्त में जब रोहिंग्या अपने देश में हिंसा का शिकार हो रहे हैं, तब भारत की ओर से उन्हें वापस भेजने की कोशिशों की मैं निंदा करता हूं।'

मानवाधिकार परिषद को संबोधित करते हुए हुसैन ने कहा कि करीब 40,000 रोहिंग्या भारत में आकर बसे हैं। इनमें से 16,000 के पास शरणार्थी के तौर पर दस्तावेज हैं। भारत को अंतरराष्ट्रीय कानूनों से बंधे होने की याद दिलाते हुए हुसैन ने कहा, 'भारत इस तरह से सामूहिक तौर पर किसी को निष्कासित नहीं कर सकता। वह लोगों को ऐसे स्थान पर लौटने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, जहां उनके उत्पीड़न और अन्य तरीकों से सताए जाने का खतरा है।'

रोहिंग्याओं के खिलाफ म्यांमार में जारी हिंसा को लेकर हुसैन ने कहा, 'अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा और अन्याय नस्लीय सफाए की मिसाल मालूम पड़ती है।' संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र को संबोधित करते हुए जैद राद अल हुसैन ने पहले 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले की बरसी का उल्लेख किया और फिर म्यांमार में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर चिंता प्रकट की।