खाड़ी में बेरोजगार हुए भारतीयों के परिवार यहां चुका रहे हैं कीमत

चेन्नई (27 अगस्त): खाड़ी देशों में नौकरी करने गए लोगों के साथ-साथ उनके परिवार भी आफतों का सामना कर रहे हैं। भले ही वह भारत में हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के बारे में जानकर आप भी सिहर उठेंगे। कवि श्यामला के पति नौकरी के लिए कुवैत गए थे, लेकिन उसे वहां पर नौकरी तो नहीं मिली पर उसकी जान जरूर चली गई। हालांकि अभी तक उसका पार्थिव शरीर भी घर नहीं पहुंचा है।

चेन्नई से लगभग 100 किमी दूर कांचीपुरम जिले के वेंबक्कम में पांच परिवारों में हर एक सदस्य खाड़ी देशों में काम करता है। मंदी के कारण बालामुर्गन जैसे कई भारतीय बेरोजगार हो गए हैं। 24 वर्षीय पांडीश्वरी ने बताया कि उसके पति की जब नौकरी चली गई थी तब वह कॉल कम किया करते थे। कोई खबर न होने पर उसके लिए हर रात अपने पति के फ़ोन का इंतजार करना किसी दु:स्वप्न से कम नहीं था।

संयुक्त परिवार होने के कारण वह अपने पति से बात भी नहीं कर पाती थी। हालांकि, अब बालामुर्गन को नौकरी मिल गई है। आज वह भाग्यशाली है कि उसकी अपने पति से वीडियो पर बात हो गई।

कवि श्यामला को अपने पति के पार्थव शरीर का इंतजार कुछ ही दूर पर रहने वाले परिवार दुखद त्रास्ती से गुजरा है। कवि श्यामला के पति मुथुवेल राजा ड्राइवर थे और उनकी मौत कुछ दिनों पहले ही कुवैत में हो गई। राजा वहां स्थानीय लोगों के संपर्क से काम करने गए थे लेकिन उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। उनका पार्थव शरीर अभी तक भारत नहीं आया है। श्यामला के तीन बच्चों को नहीं मालूम कि अब उन्हें अपने पिता का चेहरा फिर से देखने को नहीं मिलेगा।

पांडीश्वरी और कवि श्यामला की कहानी वेंबक्कम में इसी तरह की त्रासदी से गुजर रही हजारों महिलाओं की व्यथा को व्यक्त करती है। एक तरफ जहां उनके पति बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, वही यहां भारत में उनके परिजन ज़िंदगी की कई विषम परिस्थितियों से मुकाबला करने को मजबूर हैं।