जानें टैक्सी ड्राइवर से कैसे डॉन बना अबू सलेम

नई दिल्ली ( 7 सितंबर ): 1993 के मुंबई ब्लास्ट में टाडा अदालत ने अपना फैसना सुना दिया है। मुंबई ब्लास्ट केस में टाडा कोर्ट अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम समेत 5 दोषियों की सजा पर फैसला सुनाया है। अपने फैसले में अदालत ने अबू सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 

अबू सलेम आजमगढ़ जिले के सरायमीर गांव में एक निम्न मध्य वर्गीय परिवार में पैदा हुआ था। अबू सलेम का जन्म 1968 में हुआ था। अबू सलेम के पिता पेशे से वकील थे। बचपन में ही पिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद जीवकोपार्जन की जिम्मेदारी अबू के कंधे पर आ गई और वह मैकेनिक का काम करने लगा। हालांकि इसी बीच इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद अबु सलेम ने घर छोड़ दिया था और उसके बाद कभी लौट कर नहीं आया।

अबू सलेम ने पहले दिल्ली की ओर रुख किया और यहां वह टैक्सी चलाने लगा। अपने रिश्तेदार के कहने पर उसने मुंबई का रुख किया। हालांकि देश की आर्थिक राजधानी में आने के बाद भी अबू ने एक बार फिर टैक्सी ड्राइवर का काम किया।

1986 में अबु सलेम ने मुंबई के बांद्रा और अंधेरी के बीच ब्रेड डिलीवरी का काम किया। इसके बाद अंधेरी में ही एक कपड़े की दुकान में अबू ने काम किया। 1987 में अबु सलेम ने एक रियल एस्टेट ब्रोकर के तौर पर भी काम किया। यह काम अबु सलेम ने अंधेरी से ही करना शुरू किया था।

इस दौरान मुंबई में ही माफिया लोगों से उसकी मुलाकात हुई और क्राइम की दुनिया की तरफ बढ़ चला। एक समय वह दाऊद इब्राहिम का निकट सहयोगी था और उसे दाऊद का दाहिना हाथ माना जाता था। मालूम हो कि हाजी मस्तान और दाऊद इब्राहिम भी आजमगढ़ से जुड़ा हुआ है।  

1988 के दौरान अबु सलेम पर अपने ही साथी से जबरदस्ती पैसे वसूल करने का आरोप लगा। यहीं से अबू सलेम ने क्राइम की दुनिया में प्रवेश किया। जबरन वसूली के इस मामले में अबु सलेम पर पहला केस दर्ज किया गया।

1989 सलेम की मुलाकात दाउद से हुई और उसने दाउद के कुछ जमीन से जुड़े काम देखना शुरू किया। यहीं से सलेम दाउद इब्राहिम के छोटे अनीस के संपर्क में आया। सलेम हथियारों की डिलीवरी का काम करता था। इसके बाद 1990 में दाउद इब्राहिम ने अबु सलेम को डी कंपनी की देख-रेख का काम सौंप दिया। इसके बाद दाउद के इशारों पर अबु सलेम ने फिल्मी सितारों और बड़े कारोबारियों से जबरन वसूली करने का काम शुरू कर दिया। हालांकि 1998 में अबु सलेम ने दाउद का साथ छोड़ कर अपना रास्ता अलग कर लिया।

अबु सलेम ने दुबई में एक बिजनस भी शुरू किया जिसे किंग्स ऑफ कार ट्रेडिंग का नाम दिया। कई सारे स्टेज शो ऑर्गेनाइज किए जिसमें वो फिल्मी सितारों को बुलाता था। यहीं पर एक शो के दौरान अबु सलेम की मुलाकात मोनिका बेदी से भी हुई।

1993 के बम धमाकों में अबु सलेम का बड़ा हाथ था। इस धमाके में लगभग 250 लोग मारे गए थे और 700 से भी अधिक लोग बुरी तरह से घायल हो गए थे। इस धमाके से 27 करोड़ की प्रॉपर्टी का नुकसान हुआ था।