जानिए, बंगाल की खाड़ी में क्यों उतारे जाएंगे 'अंडरवॉटर रोबोट्स'

नई दिल्ली, (15 जून): भारत और ब्रिटेन के वैज्ञानिक बंगाल की खाड़ी में अंडरवॉटर रोबोट्स उतारने जा रहे हैं। जिससे- 'मॉनसून किस तरह समुद्री अवस्थाओं से प्रभावित होता है?' इसे मॉनीटर करने में मदद मिलेगी। इस पहल से बारिश के पूर्वानुमान लगाने में भी मदद मिलेगी।

'इकॉनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, बे ऑफ बंगाल बाउंड्री लेयर एक्सपेरीमेंट (BoBBLE) का संचालन ब्रिटेन की दो यूनिवर्सिटीज़- यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया (UEA) और यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग कर रही हैं। जिसके लिए साउथैंप्टन में स्थित नेशनल ओशियनोग्राफी सेंटर सहयोग कर रहा है।

भारत की तरफ से सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक एंड ओशियनिक साइंसेस (CAOS), इंडियन नेशनल सेंटर फॉर क्लाइमेट इन्फॉर्मेशन सर्विसेस (INCOIS), नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फॉरकास्टिंग (NCMRWF) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशियन टेक्नॉलॉजी (NIOT) प्रोजेक्ट में सहयोग कर रहे हैं।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने बताया कि इंडियन रिसर्च वेसल सिंधु साधना वैज्ञानिकों के साथ 24 जून को चेन्नई से रवाना होगा। उन्होंने बताया, "एक बार यह समुद्र में पहुंचने के बाद वे 7 अंडरवॉटर ग्लिडर्स छोड़ेंगे। जो समुद्र की विशेषताओं का मापन करेंगे- जैसे तापमान, खारापन और करंट।"

ऐसा अनुमान है कि इस बड़े पैमाने की वैज्ञानिक पहल से भारतीय मॉनसून के आने के संबंध में पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलेगी। ये सूचनाएं और ज्यादा सटीक होगी, जो पहले नहीं मिल पाती थीं।