UN में भारत की टो टूक, तालिबान-अल कायदा-लश्कर पर बिना सफाई दिए हो कार्रवाई

नई दिल्ली ( 22 जून ): यूनाइटेड नेशन्स (यूएन) में भारत ने दो टूक कहा है कि तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, अल कायदा, दाएश, लश्कर-ए-तैयबा जैश-ए-मोहम्मद समेत तमाम आतंकी गुटों पर बगैर सफाई दिए कार्रवाई की जानी चाहिए।


यूएन में भारत के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव अकबरुद्दीन ने कहा कि इंटरनेशनल कम्युनिटी की सबसे अहम ड्यूटी है कि वो तय करे कि आतंकियों को कहीं भी किसी भी स्तर पर सुरक्षित पनाह न मिल सके। अकबरुद्दीन ने कहा कि हमें अच्छे और बुरे आतंकवाद में भेद नहीं करना चाहिए या हमें एक आतंकी गुट का दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।


अफगानिस्तान की स्थिति पर बोलते हुए, संयुक्त राष्ट्र में सैयद अकबरुद्दीन ने कहा है, 'क्यों अफगानिस्तान में हमलों और हिंसा को सरकार विरोधी तत्वों के ठप्पे के तहत या सिविल और राजनीतिक संघर्ष के परिणाम के रूप में देखा जाता है? कौन अफगानिस्तान में सरकार के विरोध में लड़ रहे लोगों को हथियार, धन और प्रशिक्षण प्रदान करा रहा है?'


ये बात किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकी गुटों का इस्तेमाल करता रहा है। पाक पर निशाना साधते हुए अकबरुद्दीन ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति स्थापित करनी है, तो उसके पड़ोसी देश को उन संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने से इनकार करना होगा, जो आतंक फैला रहे हैं। आखिर कौन से देश हैं जो आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह बने हुए हैं?'


अफगानिस्तान अपने कई प्रदेशों में बड़े आतंकी हमलों का सामना कर चुका है। यहां अस्पतालों, स्कूलों, अंत्येष्टि या अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसियों और राजनयिक मिशनों पर हमले हुए हैं। अफगानिस्‍तान आतंकवाद से जूझ रहा एक ऐसा राष्ट्र है जो अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान अकबरुद्दीन ने चीन पर तंज कसते हुए उन्होंने यूएन में आतंकवाद जैसे मुद्दे के खिलाफ कदम उठाने पर 'अलगाव' को भी जिम्मेदार ठहराया।