यूरोपियन यूनियन में ब्रिटेन की कश्मकश पर गुरुवार को होगा जनमत संग्रह

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली (22 जून): ब्रिटेन इन दिनों एक दिलचस्प कश्मकश से गुज़र रहा है। इस कश्मकश का नाम है 'ब्रेक्ज़िट'। यानि ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन के साथ रहे या फिर उससे अलग हो जाए। इसे लेकर ब्रिटेन के लोग दो खेमों में बंट गए हैं। कल जनमत संग्रह के ज़रिए इस पर फैसला होगा। अगर  ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से अलग हुआ तो भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा आइए जानते हैं।

कल यानि 23 जून को ब्रिटेन के लिए एक बड़ा दिन है। कल तय हो जाएगा कि ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन के साथ रहेगा या फिर उससे अलग हो जाएगा। ब्रिटेन की जनता को जनमत संग्रह के ज़रिए ये फैसला करना है कि वो यूरोपियन यूनियन के साथ रहना चाहती है या फिर उससे अलग होना चाहती है। इसको लेकर जनता दो गुटों में बंटी हुई है। एक गुट अलग होना चाहता है जब्कि दूसरा यूरोपियन यूनियन के साथ बने रहना चाहता है।

यूरोपियन यूनियन से नाता तोड़ लेने के पक्षधर लोगों की दलील है कि ब्रिटेन की पहचान, आज़ादी और संस्कृति को बचाए रखने के लिए ऐसा करना ज़रूरी है। ये लोग ब्रिटेन में भारी संख्या में आने वाले प्रवासियों पर भी सवाल खड़े करते हैं। जबकि रिमेन यानि यूरोपियन यूनियन के साथ बने रहने के पक्षधर दलील देते हैं कि ब्रिटेन की अर्थव्यस्था के लिए ऐसा करना ज़रूरी है। और इस फायदे के सामने प्रवासियों का मुद्दा बहुत छोटा है। जनमत संग्रह को लेकर ब्रिटेन की प्रमुख पार्टियों में भी दरार पड़ गई है। कंज़र्वेटिव पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री डेविड कैमरोन भी यूरोपियन यूनियन के साथ बने रहने के पक्ष में हैं।

हम आपको बता दें कि अगर ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से अलग हुआ तो उसका उल्टा असर ब्रिटेन पर देखने को मिल सकता है। दरअसल, यूरोप ही ब्रिटेन का सबसे बड़ा बड़ा बाज़ार है और विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्त्रोत भी। इन्हीं बातों ने लंदन को दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय बाज़ार बनाया। इसीलिए ब्रिटेन का यूरोपियन यूनियन से बाहर निकलना उसके इस स्टेटस को खतरे में डाल सकता है। 

ब्रिटेन का यूरोप से अलग होने से भारत पर भी बड़ा असर पड़ेगा। ब्रिटेन में काम कर रही 800 भारतीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है। खास तौर पर भारतीय आईटी सेक्टर के 6 से 18 फीसदी कमाई ब्रिटेन से ही होती है। भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप में घुसने का रास्ता ब्रिटेन से शुरु होता है। ऐसे में ब्रिटेन के यूरोप से अलग होने पर यूरोप के देशों से नए करार करने होंगे। कंपनिय़ों का खर्च बढ़ेगा और अलग अलग देशों के अलग अलग नियम-कानून से जूझना होगा।

बता दें कि 1973 से ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन का हिस्सा है। और इस संघ में कुल 28 देश हैं जिसकी संसद में यूरोप के सभी देश अपने चुने हुए सदस्यों को भेजते हैं। इसकी कार्यपालिका यूरोपियन कमीशन का एक प्रेज़िडेंट होता है और एक कैबिनेट भी, जिसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि होते हैं।