अपराधिक जांच के लिए नहीं होगा आधार डाटा का इस्तेमाल: UIDAI

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जून): भारत की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई ने शुक्रवार को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) को अपराध जांच के लिए आधार बॉयोमीट्रिक डेटा साझा करने से इनकार कर दिया। यूआईडीएआई ने इसके लिए काफी तर्क भी दिए। बता दें, हाल ही में एनसीआरबी चीफ ने आधार बॉयोमीट्रिक डेटा को साझा करने की बात कही थी।

नेशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) डायरेक्टर इश कुमार ने गुरुवार को पुलिस को आधार डेटा का लिमिटेड एक्सेस दिए जाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि फर्स्ट टाइम ऑफेंडर्स और बिना शिनाख्त के शवों को ट्रेस करने में इससे मदद मिलेगी।

यूआईडीएआई ने शुक्रवार को कहा कि आधार अधिनियम के सेक्शन 29 के अनुसार, यूआईडीएआई द्वारा एकत्रित बॉयोमीट्रिक्स डेटा केवल आधार बनाने और आधार धारकों की पहचान के प्रमाणीकरण के उद्देश्य से उपयोग किया जा सकता है और किसी अन्य उद्देश्य के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है।

19वें ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ डायरेक्टर्स ऑफ फिंगरप्रिंट ब्यूरो में बोलते हुए एनसीआरबी चीफ इश कुमार ने कहा था कि देश भर में करीब 50 लाख केस हर साल रजिस्टर होते हैं। इनमें करीब 80-85 प्रतिशत लोग पहली बार अपराध करते हैं, जिनका पुलिस के पास कोई रिकॉर्ड नहीं होता है। इसके अलावा हर साल करीब 40,000 शव बरामद होते हैं, जिनकी शिनाख्त नहीं हो पाती है। आधार डेटा के जरिए इन शवों की शिनाख्त की जा सकती है और उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जा सकता है। वहीं, इस मामले में गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर का कहना था कि एनसीआरबी डायरेक्टर के प्रस्ताव पर मंत्रालय में चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा, 'हम इस सुझाव को मानने की कोशिश करेंगे। यह कदम अपराध रोकने में अहम हो सकता है।'