भारत मेंं इस नस्ल की गायों का बनेगा आधार कार्ड, पढ़िए इसके पीछे की कहानी

नई दिल्ली (5 जुलाई): गंगा स्वच्छता अभियान शुरु करने के बाद अब मोदी सरकार ने गाय पर ध्यान देना शुरु कर दिया है। देसी नस्ल की गायों को विशिष्ट दर्जा दिये जाने उन्हें चोरी-छिपे स्लाटर हाउसेस में भेजने पर रोक लगाने और गायों नस्ल संवर्धन के लिए विशेष योजना शुरु की जा रही है। जिस तरह हर आदमी की पहचान और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने के लिए आधार कार्ड दिया गया है। ठीक उसी तरह अब देश की हर गाय का अपना अलग रिकॉर्ड होगा। आधार कार्ड की तरह देसी गायों को एक टैग जारी किया जायेगा।  

इस टैग में गाय का पर्सनल नम्बर होगा। टैग में गाय की नस्ल से लेकर उसके बारे में हर एक जानकारी मौजूद होगी। राज्य सरकारों की मदद से देश में करीब 8.5 करोड़ गायों को यह टैग जारी किया जाएगा। सरकार यह कदम स्वदेशी नस्ल में बढ़ोतरी और दूध उत्पादन में इजाफे के लिए कर रही है। इस टैग के साथ गाय का एक हेल्थ कार्ड भी होगा। जिसमें उसके दूध की मात्रा, दूध और उसकी  स्वास्थ्य संबंधित जानकारी होगी। उपलब्ध आकंड़ो के मुताबिक देश में स्वदेशी नस्ल की 70 फीसदी गायें हैं जिनकी संख्या लगभग साढ़े आठ करोड़ दूध देने वाली गाय हैं। जूनागढ़ एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने जब से यह कहा है कि देसी नस्ल की गीर गाय के मूत्र से सोना निकाला जा सकता है। तभी से अचानक देसी गायों पर लोगों का ध्यान ज्यादा जाने लगा है। अब गीर के अलावा गाय की अन्य देसी नस्लों पर भी शोध शुरु हो गया है।