'उड़ता पंजाब विवाद' : बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के ख़िलाफ़ NGO सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

नई दिल्ली (15 जून) :  फिल्म 'उड़ता पंजाब'  की रिलीज़ को दो दिन रह गए हैं। लेकिन फिल्म के निर्माताओं के लिए नई दिक्कत खड़ी हो गई है। एक एनजीओ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फिल्म से संबंधित फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। '

'ह्यूमन राइट्स अवेयरनेस' नाम के एनजीओ ने याचिका में तर्क दिया है कि फिल्म में कट्स के बारे में हाईकोर्ट फैसला नहीं ले सकता। एनजीओ का आरोप है कि पंजाब में नशे की समस्या पर आधारित इस फिल्म में राज्य की छवि को खराब दिखाया गया है।   

एनजीओ के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की तात्कालिकता को देखते हुए शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया क्योंकि फिल्म शुक्रवार को रिलीज़ होने जा रही है। केस को सुनवाई के लिए लिया जाए या नहीं, ये तय करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पेपरवर्क पूरा करने के लिए कहा है।  

बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेंसर बोर्ड को 'दादी'  जैसा व्यवहार करने के लिए फटकार लगाते हुए फिल्म को 48 घंटे में सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया था। साथ ही फिल्म में सेंसर बोर्ड के सुझाए 13 कट्स में से सिर्फ एक को बररकार रखने के लिए कहा गया था।  

फिल्म 17 जून को रिलीज़ होने वाली है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब स्थित एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट से इसकी रिलीज़ पर रोक लगाने का आग्रह किया है।

पंजाब में सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने कहा है कि उसे फिल्म की रिलीज़ पर आपत्ति नहीं है। एसएडी के मुताबिक पंजाब की जनता ही इस फिल्म का फैसला करेगी।  

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एस सी धर्माधिकारी और जस्टिस शालिनी फांसलकर-जोशी ने अपने फैसले में सेंसर बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा था- "दादी की तरह बर्ताव मत करो। समय के हिसाब से बदलो। सीबीएफसी को आर्ट के मामले में अति संवेदनशील नहीं होना चाहिए।"