सैनिकों का वेतन तो बढ़ाती नहीं लेकिन हथियारों की खरीद में घोटाले करती है मोदी सरकार: ठाकरे


इंद्रजीत सिंह, मुंबई (24 दिसंबर): राम मंदिर निर्माण को लेकर शिवसेना आक्रामक हो गई है। अयोध्‍या की तरह शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को पंढरपुर में महासभा की। शिवसेना ने इसमें 5 लाख शिवसैनिकों के जुटने का दावा किया। महासभा को संबोधित करते हुए ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। ठाकरे ने कहा कि अभी हाल में प्रधानमंत्री महाराष्ट्र आए और कई वायदे किए। इनमें प्रदेश को 8 हजार करोड़ देने की भी बात की लेकिन अबतक एक भी वादा पूरा नहीं किया गया।

पंढरपुर का जिक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री अक्सर विदेश दौरे पर रहते हैं। बकौल ठाकरे, 'प्रधानमंत्री एकबार इस पावन जगह पर आएं तो उनके सारे पाप धुल जाएंगे।' ठाकरे ने आगे कहा, 'मोदी सरकार ने आर्मी के जवानों का वेतन नहीं बढ़ाया लेकिन राफेलजैसे भ्रष्ट सौदे करने में जरा भी हिचक नहीं।'

राम मंदिर मुद्दे पर भी शिवसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री की कड़ी आलोचना की और कहा कि केंद्र सरकार राम मंदिर के मसले पर कुंभकर्ण की नींद सो रही है लेकिन जनता इस बार उसे जगा देगी। उद्धव ने कहा कि वे जल्द ही वाराणसी जाएंगे और राम मंदिर निर्माण का आंदोलन तेज करेंगे।


ठाकरे ने जेडीयू चीफ नीतीश कुमार और एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि नीतीश और पासवान को हिन्दुत्व और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर अपना रुख घोषित करना चाहिए। राम मंदिर पर ठाकरे ने कहा कि 30 साल हो गए और सरकार आज भी कह रही है कि मामला कोर्ट में है। उन्होंने कहा, 'हिंदू मासूम हैं, मूर्ख नहीं। एक बार संसद में राम मंदिर मुद्दे पर बहस करा लीजिए, पता लग जाएगा कि एनडीए में कौन आपके साथ है।' ठाकरे ने कहा कि शिवसेना, राम मंदिर, किसान कर्ज माफी और फसल बीमा पर फैसला हो जाने तक बीजेपी के साथ गठबंधन में दिलचस्पी नहीं रखती है।  


ठाकरे ने कहा, 'अयोध्या के बाद, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी जा सकता हूं।' राफेल मुद्दे को लेकर ठाकरे ने कहा, 'राफेल का कॉन्ट्रैक्ट एक ऐसी कंपनी को दिया गया, जिसे इसका कोई अनुभव नहीं था। देश के सैनिकों को वेतन में बढ़ोतरी चाहिए, आप (केन्द्र सरकार) वह नहीं करेंगे लेकिन हथियारों और गोला-बारूद की खरीद में घोटाला जरूर करेंगे।' उन्होंने कहा, 'मिजोरम और तेलंगाना के चुनाव परिणामों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मतदाताओं ने राष्ट्रीय पार्टियों के बजाय मजबूत क्षेत्रीय दलों को चुना है।'