अब घास-फूस से बनेंगे कार बस और ट्रकों के टायर

नई दिल्ली (13 फरवरी): वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिससे घास-फूस से और दोबारा उपयोग में आ सकने वाले सामानों बने ग्रीन कार टायर बनाये जायेंगे। परंपरागत कार के टायरों से पर्यावरण को नुकसान होता है। क्योंकि इनमें जीवाश्म ईंधन का प्रयोग किया जाता है। बायोमास से बने नए कार टायर जिनमें घास-फूस बगैरा होता हैं, लेकिन उनमें मौजूदा कार टायरों की तरह ही रासायनिक मेकअप, रंग, आकार और परफॉर्मेंस में समान होंगे।

अमेरिका के मिनिसोटा यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर पॉल डुएनहावर ने कहा कि हमारी टीम ने एक नए रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा कार टायर में प्रयोग होने वाला महत्वपूर्ण अणु ‘आइसोप्रिन’ बनाया है। हमने इसे प्राकृतिक तत्वों जैसे घास-फूस और फसलों को अवशेष से बनाया है। उनका कहना है कि यह शोध अरबों डॉलर के ऑटोमोबाइल उद्योग पर अपना बड़ा प्रभाव छोड़ेगा। यह शोध एसीएस कैटालिसिस पत्रिका में प्रकाशित हुआ।