हौसला, हिम्मत और जुनून को समझना है तो पड़ लीजिए ये खबर

नई दिल्ली,(4 जून): मशहूर कवि मुन्नवर राना की एक मशहूर शायरी है 'बहादुर आदमी के हाथ भी हथियार होते हैं, वरना बुजदिलों की हिफाजत मैगजीनें भी नहीं करतीं' जी हां कहा जाता है कि अगर किसी के हौसले बुलंद हों तो कोई भी उसे उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकता है।ऐसी ही एक खबर सामने आई है जिसमें दो दोस्तों के जज्बे को सलाम करने का मन करता है। बचपन के दो दोस्त, लेकिन एक का एक हाथ नहीं है और दूसरे का एक पैर नहीं। दोनों ही दिव्यांग, मगर दोनों ने ही साइकिल से लगभग 10,000 किलोमीटर का सफर तय कर पूरी दुनिया के सामने चुनौती पेश कर दी है।इन बाल सखाओं का यह रिकॉर्ड लिम्का बुक में भी सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। एक पैर गंवा चुके घनश्याम ने अब अपने एक हाथ वाले बाल सखा मोतीलाल के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दरख्वास्त की है कि उन्हें पाकिस्तान, चीन, नेपाल व बांग्लादेश की साइकिल यात्रा करने की अनुमति प्रदान की जाए।