कीमोथैरेपी के साथ क्लासेस, फिर भी आईसीएससी में 98.5 फीसदी

नई दिल्ली (9 मई): जिस बीमारी के आगे बड़े-बड़े निढाल हो जाते हैं, काम करना तो दूर खुद को संभल पाना भी मुश्किल होता है ऐसी परिस्थितियों में तो स्टूडेंट्स ऐसा कमाल किया है और हिम्मत दिखायी है जो शायद आज तक कोई न कर पाया हो। हम बात कर रहे हैं 18 साल के राघव चांडक और दिगांता चक्रबर्ती की। ये दोनों कोलकाता के हैं। राघव चांडक ब्लड कैंसर से पीड़ित है और दिगांता को फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। इस सबके बावजूद राघव ने आईसीएससी के एक्ज़ाम्स में 95.8 फीसदी और दिगांता 91 फीसदी मार्क्स हासिल किये हैं।

राघव कोलकाता के हेरिटेज स्कूल का स्टूडेंट है जबकि दिगांता डीपीएस न्यू टाउन में पढता है। राघव को पिछले साल ही डॉक्टरों ने बताया कि उसे ब्लड कैंसर है। उसकी कीमोथेरेपी होती है। इसलिए वो रेग्युलर क्लासेस भी नहीं कर पाया। उसके पिता मनोज चांडक कहते हैं कि काश सभी क्लासेस अटैंड करता तो वो आईसीएससी टॉप कर सकता था। इसी तरह दिगांता चक्रवर्ती जब कैलकलस के सवालों को हल करता है तो फेफड़े से लीक हुई हवा एक ट्यूब से बाहर निकाला जाता है। उसने अपने एक्ज़ाम हॉस्पिटल बेड से ही दिये।  बायॉलजी और मैथ्स का पेपर देने वाले दिगांता ने बताया, 'मैंने इतने बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद नहीं की थी लेकिन कुछ बेहतर करने के लिए दृढ़ निश्चयी था। दिगांता एयरोनॉटिकल इंजिनियर बनना चाहता है।