110 सालों में पहली बार लखनऊ की मशहूर दुकान 'टुंडे-कबाबी' रही बंद


नई दिल्ली ( 23 मार्च ): उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही अवैध बूचड़खाने बंद कराने का काम जोर-शोर से किया जा रहा है। जिसकी वजह से चलते मीट और बीफ की सप्लाई में भारी गिरावट आ गई है।


लखनऊ में करीब सवा सौ साल पुरानी टुंडे कबाबी की मशहूर दुकान पर भी इन दिनों बूचड़खानों पर कार्रवाई का असर देखा जा रहा है। दरअसल बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में अवैध बूचड़खानों को बंद करने का वादा किया था। योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च को सूबे की सत्ता संभाली है। उसके बाद से ही अवैध बूचड़खानों पर जगह-जगह गाज गिर रही है।  



इसी वजह से लखनऊ की मशहूर 'टुंडे कबाबी' दुकान 110 सालों में पहली बार बुधवार को बंद रही। टुंडे कबाबी के मालिक अबू बकर ने गुरुवार को कहा, 'बूचड़खाने बंद होने की वजह से मटन और भैंसे के मीट की जबरदस्त कमी हो गई है। जिसकी वजह से मेरी दुकान पर अब सिर्फ चिकन ही बिक रहा है।'


हालांकि लखनऊ की इस मशहूर दुकान के मालिक ने यह भी कहा कि अवैध बूचड़खानों को बंद करने का सीएम का फैसला बहुत अच्छा है, लेकिन उन्होंने सीएम से अनुरोध किया कि वह लीगल और लाइसेंस वाले बूचड़खानों पर पाबंदी न लगाएं।


1905 में लखनऊ के अकबरी गेट इलाके में शुरू हुई इस दुकान का कबाब और पराठा पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन भैंसे के मीट की कमी की वजह से अब इस दुकान पर चिकन के कबाब ही मिल रहे हैं।