#prayforPakistan का सच सामने आया, एफिल टॉवर की पुरानी फोटो हुई थी वायरल

नई दिल्ली (30 मार्च): लाहौर में हुए हमले के बाद एक फोटोग्राफ खूब वायरल हुआ। जिसमें एफिल टॉवर को पाकिस्तान के झंडे की रोशनी में प्रकाशित किया गया था। इसमें दावा किया गया था कि ऐसा लाहौर हमलों के शोक में किया गया है। लेकिन यह बात अब झूठी साबित हो गई है। बताया जा रहा है कि यह तस्वीर पुरानी और रग्बी वर्ल्ड कप के दौरान की है। 

रविवार को हुए आत्मघाती हमले के बाद ट्विटर और फेसबुक पर इस स्मारक की हरे और सफेद रोशनी में प्रकाशित तस्वीर को काफी शेयर किया गया। कई लोगों ने फ्रांस की तरफ से पाकिस्तानी शहर के साथ इस कथित एकजुटता की तारीफ भी की। गौरतलब है, ईस्टर के मौके पर लाहौर के गुलशन-ए-इकबाल पार्क में हुए इस आत्मघाती हमले में करीब 72 लोग मारे गए थे।

यह हमला ब्रुसेल्स में हुए हमले के बाद हुआ। ब्रुसेल्स हमलों के बाद दुनिया भर के स्मारकों को बेल्जियम के झंडे के रंग में प्रकाशित किया गया था। इसी तरह का दृश्य पेरिस में पिछले साल नवंबर में हुए हमलों के बाद भी देखने को मिला था। लेकिन पाकिस्तान में हुए हमले के बाद ऐसा प्रदर्शन नहीं किया गया। लेकिन इस तस्वीर को बड़े पैमाने पर हैशटैग #prayforPakistan के नाम से शेयर किया गया।

एक व्यक्ति ने इसकी तारीफ करते हुए इसे "ब्यूटीफुल शो ऑफ सॉलिडैरिटी (एकजुटता का खूबसूरत प्रदर्शन)" कहा। लेकिन कमेंटेटर्स ने तुरंत ही इस बात को रखा कि इन फोटोग्राफ्स को ट्विटर पर 2007 के दौरान इस्तेमाल किया गया था।

ब्रिटिश अखबार 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, एफिल टॉवर की वेबसाइट ने इस बारे में सही जानकारी दी है। जिसमें कहा गया है कि स्मारक को फ्रांस के रग्बी वर्ल्ड कप को होस्ट करने के दौरान इस तरह प्रकाशित किया गया था। इसमें हरा भाग पिच का, जबकि व्हाइट बीम्स गोलपोस्ट्स और विशाल रग्बी बॉल को रिप्रजेंट करते हैं। 

सही तथ्यों के सामने आने पर कई लोगों ने यूरोपीय लोगों की आलोचना करते हुए लिखा, कि "वे (यूरोपीय) तभी परेशान होते हैं, जब वे खुद मरते हैं। एफिल टॉवर को पाकिस्तान के लिए प्रकाशित नहीं किया गया। उम्मीद करें कि हम अभी भी पूर्वाग्रहग्रस्त दुनिया में नहीं रहते।" 

बता दें, लाहौर हमलों की जिम्मेदारी तालिबान के एक गुट ने ली है।