ट्रंप-पुतिन की दोस्ती में दरार, अब शुरू होगा परमाणु हथियारों की होड़

वॉशिंगटन (24 दिसंबर): अमेरिका में पिछले दिनों संपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान कहा जा रहा था की रूस के राष्ट्रपति पुतिन ट्रंप का समर्थन कर रहे हैं और पुतिन में दोस्ती है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से ही दोनों के रिश्तों में तल्खी बढ़ती आती नजर आ रही है।

ट्रंप और पुतिन दोनों ही अपने-अपने देशों की परमाणु क्षमता बढ़ाने और इसे और मजबूत किए जाने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। गुरुवार को ट्रंप ने परमाणु प्रसार पर नई बहस छेड़ दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि अमेरिका को अपनी परमाणु क्षमता और ज्यादा बढ़ाने की काफी जरूरत है। ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका को तबतक ऐसा करते रहना चाहिए जबतक कि परमाणु हथियारों को लेकर बाकी दुनिया का दिमाग ठिकाने नहीं आ जाता है।

ट्रंप का यह बयान आने से पहले गुरुवार को ही पुतिन ने भी कहा था कि आने वाले साल में रूस की परमाणु क्षमताओं को और ज्यादा मजबूत करना उनकी प्रमुख सैन्य रणनीति होगी। शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पुतिन से ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने की बात कहना सामान्य बात है। पुतिन ने कहा कि ट्रंप ने वही कहा है जो वह अपने चुनावी वादों में भी बार-बार दोहराते आए हैं। 

पुतिन ने हालांकि यह दावा भी किया कि रूस की सेना किसी भी दुश्मन देश की सेना से ज्यादा मजबूत है। साथ ही साथ, पुतिन ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। पुतिन ने कहा कि अमेरिकी मिसाइल रक्षा तकनीक के कारण रूस के परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण काफी जरूरी है। पुतिन और ट्रंप की इस नई भाषा में परमाणु हथियार की बेहद तेज रफ्तार दौड़ का संकेत साफ दिख रहा है।

इससे पहले 15 दिसंबर को राष्ट्रपति पुतिन ने ट्रंप को एक चिट्ठी लिखा था। जिसमें उन्होंने लिखा था कि गंभीर अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय चुनौतियों के मद्देनजर मौजूदा दौर में पूरी दुनिया के अंदर स्थायित्व और सुरक्षा सुनश्चिति करने के लिए रूस और अमेरिका के आपसी रिश्ते काफी अहम साबित होंगे। इस चिट्ठी पर प्रतिक्रिया करते हुए ट्रंप ने कहा कि पुतिन की सोच और चिंताएं बिल्कुल सही हैं। ट्रंप ने भी रूस के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद जाहिर की, ताकि अमेरिका और रूस को अलग-अलग विरोधी रास्तों पर ना चलना पड़े।

लेकिन ट्रंप के ताजा बयान से यह आशंका मजबूत हो गई है कि शीत युद्ध के दौर की ही तरह दोनों देशों के बीच परमाणु हथियार विकसित करने की दौड़ बढ़ेगी। इसके जवाब में दुनिया के बाकी देश भी परमाणु दौड़ में शामिल हो सकते हैं।