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ट्रंप ने चीन के खिलाफ उठाया एक और सख्त कदम

अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने चीन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर के मुद्दे पर लगाई टेक्निकल होल्ड को 23 अप्रैल से पहले वापस लेले वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहे

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली(12 अप्रैल): अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने चीन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर के मुद्दे पर लगाई टेक्निकल होल्ड को 23 अप्रैल से पहले वापस लेले वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहे। इन वी-3 कंट्रीज ने कहा है कि अगर चीन ने ऐसा नहीं किया तो 23 अप्रैल के बाद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने वाला प्रस्ताव सिक्योरिटी काउंसिल के स्थाई सदस्यों के सामने पेश कर दिया जायेगा।हालांकि, इन तीनों देशों ने  सिक्योरिटी काउंसिल के स्थाई सदस्यों के बीच प्रस्ताव की प्रति वितरित कर दी है लेकिन उसे औपचारिक तौर पर सदन के पटल पर नहीं रखा गया है। अमेरिका-फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा है कि 23 अप्रैल तक चीन के रुख का इंतजार किया जायेगा। अगर वो अपन रुख पर अड़ा रहा तो प्रस्ताव पटल पर रख दिया जायेगा और चीन को बहस के लिए मजबूर किया जायेगा। चीन ने पूछा जायेगा कि आखिर वो पूर्व घोषित आतंकी संगठन के सरगना को आतंकियों की वैश्विक सूची में शामिल किये जाने का विरोध क्यों कर रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि बहस के अंत में मतदान के समय संभवतः चीन मतदान प्रकिया से खुद को अलग कर लेगा और उसकी अनुपस्तिथि को ही सहमति मानकर मसूद अजहर को वैश्विक आतंकियों की सूची में डालकर पाकिस्तान की नकेल कस दी जायेगी।

चीन अपने सदाबहार दोस्त को अभी तक बचाता चला आ रहा है। भारत और दुनिया के कुछ अन्य देशों के बार-बार कहने के बाद भी पाकिस्तान ने आतंकियों की सेंक्चुरियों को ख्तम नहीं किया है। चीन अच्छी तरह से जानता है कि पाकिस्तान की आर्मी और उनकी खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकी संगठनों को खड़ा करती हैं। उन्हें धर्म के नाम पर बनाकर आम लोगों की सहानुभूति हासिल की जाती है। धर्म के लिए युद्ध का नारा देकर लोगों को भरती किया जाता है। लेकिन चीन सरकार पाकिस्तान में अपने भारी निवेश के कारण कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाता जिससे पाकिस्तानी सेना या धर्म की आड़ में फल-फूल रहे आतंकी गिरोह उसकी परियोजनाओं को नुकसान न पहुंचा दें।Image Courtesy:Google

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