ट्रंप के इस ऐलान से मुसलमानों में पैदा हुआ खौफ...


वाशिंगटन (19 नवंबर): अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुस्लिम बाहुल देशों से आए प्रवासियों का पंजीकरण करवाने और सूची तैयार करवाना चाहते हैं। लेकिन इनके इस नीति का अब अमेरिका में ही विरोध शुरू हो गया है। डेमोक्रेटिक सांसदों और मानवाधिकार संगठनों ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित योजना की आलोचना की है। 9/11 के हमले के बाद अमेरिका में नेशनल सिक्योरिटी एंटरी-एक्जिट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (NSIIRS) कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके तहत खास मुस्लिम बहुल देशों से अमेरिका आने वाले लोगों को तत्काल संघीय सरकार के समक्ष पंजीकरण कराना पड़ता है या निर्वासन का सामना करना पड़ता है।

सीनेटर डिक डर्बिन के मुताबिक हमारे देश में अरब और मुस्लिमों को लक्ष्य करके विफल कार्यक्रमों को फिर से बहाल करना यह दिखाता है कि चुनाव की रात ISISक्यों जश्न मना रहा था। उन्होंने कहा कि इसकी वजह यह थी कि देश डर के साये में नागरिक अधिकारों को कुचलने की तरफ बढ़ रहा था। हमारे शत्रु उत्साहित हैं और नयी नियुक्तियों से उनका खेमा मजबूत हो रहा है।


साथ ही डर्बिन ने कहा कि साल 2002 में मैंने इस कार्यक्रम को बंद करने की मांग की थी क्योंकि इससे आतंकवाद से निपटने में मदद मिलेगी, इस बात को लेकर गहरी शंका थी। आतंकी विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि इस कार्यक्रम से देश की सुरक्षा के लिए निर्धारित कीमती कोष बर्बाद हुआ और अरब एवं अमेरिकी मुस्लिम अलग-थलग पड़ गये। इस तरह के विफल कार्यक्रम आतंकवाद से निपटने की दिशा में गलत कदम हैं और इसकी वापसी कभी नहीं हो, इसके लिए मैं लड़ूंगा।


कांग्रेशनल प्रोगेसिव कॉकस (CPC) के सह-अध्यक्ष रॉल एम ग्रिजाल्वा और केथ एलिसन, कांग्रेशनल एशियन पेसिफिक अमेरिकन कॉकस की अध्यक्षा जूडी चू, सीपीसी उपाध्यक्ष कांग्रेसी माइक होंडा और सीपीसी उपाध्यक्ष मार्क टोकानो ने जापानी-अमेरिकी नजरबंदी शिविरों का इस्तेमाल मुस्लिमों के पंजीकरण के लिए करने के ट्रंप के सहयोगी कार्ल हिग्बी के सुझाव की आलोचना की है। होंडा के मुताबिक ये ऐसी टिप्पणियां परेशान करने वाली हैं। यह भय है, साहस नहीं। यह नफरत है, नीति नहीं।

वहीं केथ एलिसन का कहना है कि राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप के निर्वाचन के बाद हजारों अमेरिकियों में आने वाले दिनों में देश के स्वरुप को लेकर भय है। पिछली रात उनके एक सहयोगी ने हमें दिखाया कि इतनी बड़ी संख्या में लोग ट्रंप प्रशासन से क्यों भयभीत हैं।

इधर जूडी चू का कहना है कि अमेरिकी मुस्लिमों को पंजीकृत करने संबंधी किसी भी प्रस्ताव के लिए हमारे समाज में जगह नहीं है। इस तरह के विचारों का आधार खौफ, विभाजन और नफरत है।