US जाने पर अब देना होगा फेसबुक और ट्विटर अकाउंट का पूरा ब्योरा!

नई दिल्ली ( 31 जनवरी ): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शरणार्थियों और सात मुस्लिम बहुल आबादी वाले देशों पर अमेरिका में प्रवेश पर बैन लगा दिया है जिसके खिलाफ अस्थायी प्रतिबंध का विरोध जारी है। दुनिया के कई देशों के नेताओं, राष्ट्राध्यक्षों और मानवाधिकार संगठनों सहित बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक भी इस बैन का विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ट्रैवल बैन के अपने इस फैसले पर बदस्तूर कायम है। इतना ही नहीं, जानकारी के मुताबिक व्हाइट हाउस जल्द ही विदेश से आने वाले सभी लोगों से उनका सोशल मीडिया डेटा लेगी। अमेरिका को और सुरक्षित बनाने के मद्देनजर यह कदम उठाया जा सकता है।

एक अमेरिकी न्यूज चैनल के मुताबिक अमेरिका आने वाले विदेशियों से उनके मोबाइल फोन सेव लोगों के नंबरों का डेटा भी मांगा जा सकता है। अगर व्हाइट हाउस यह फैसला लेता है, तो इसे नागरिक स्वतंत्रता का हनन माना जा सकता है। व्हाइट हाउस के पॉलिसी निदेशक स्टीफन मिलर ने चैनल को बताया कि अभी इसे लेकर शुरुआती स्तर की बातचीत हो रही है। इसपर किस तरह अमल किया जाएगा, इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। खबरों के मुताबिक आने वाले समय में अगर अमेरिका आने वाला कोई भी विदेशी नागरिक अपने सोशल मीडिया अकाउंट और मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट साझा करने से मना करता है, तो शायद उसे अमेरिका में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

आतंकी तशफीन मलिक ने कैलिफोर्निया में जो हमला किया था, उसके पहले उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर लोगों से जिहाद के लिए खड़े होने की अपील की थी। इस घटना में 14 लोगों की मौत हुई थी और 22 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। सूत्र के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने इस घटना पर चिंता जाहिर की है। मलिक पाकिस्तानी मूल का अमेरिकी नागरिक था। उसकी पत्नी का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। आरोप है कि मलिक और उसकी पत्नी दोनों ऑनलाइन गतिविधियों के कारण ही कट्टरपंथ से प्रभावित हुए और उन्होंने मिलकर आतंकवादी हमले को अंजाम दिया।

एक इमिग्रेशन वकील ने दावा किया है कि अमेरिकी सीमा पर तैनात अधिकारी कुछ ग्रीन कार्ड होल्डर्स के फेसबुक अकाउंट्स की जांच कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी हवाईअड्डों पर फंसे विदेशी यात्रियों के सोशल मीडिया खातों की जांच की जा रही है और लोगों से उनकी राजनीतिक विचारधारा के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं। पिछले कुछ समय में ऑनलाइन सुरक्षा का हवाला देकर लोगों की निजता का उल्लंघन किए जाने की कई खबरें सामने आई हैं। जानकारों का कहना है कि यह अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन 'फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन' का उल्लंघन है।