इजरायल करता है रेगिस्तान में खेती, यह किसी चमत्कार से कम नहीं...

नई दिल्ली (18 अक्टूबर): तकनीक के मुद्दे पर दुनिया में कोई भी इजरायल का सानी नहीं है। अगर आप यह सोचते हैं कि रेगिस्तान में खेती नहीं हो सकती तो इजरायली प्रौद्योकियों ने यह संभव कर दिखाया है। आज आधुनिक तकनीकियों की बदौलत ही इजरायल के दक्षिण स्थित अरावा रेगिस्तान में कठिन जलवायु होने के बावजूद स्ट्रॉबेरी, आर्गन पेड़ और मछली का स्थायी उत्पादन संभव हो सका है।

अरावा रेगिस्तानी घाटी है जो मृत सागर से लेकर लाल सागर तक फैली हुई है। कृषि के लिए यह क्षेत्र काफी चुनौती भरा है। यहां पानी की मात्रा भी अधिक नहीं है और तापमान भी काफी रहता है। ऐसे में यहां खेती का विकास आसान नहीं कहा जाएगा। यहां खेती को विकसित करने वाले कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि विषम जलवायु के बावजूद वे यहां ऐसे किस्मों की पैदावार को लेकर उत्साहित हैं, जिनमें विकास करने की अपनी प्राकृतिक क्षमता है। वे यहां फसलों की पैदावार को अविश्वसनीय मानते हैं।

यहां खेती की संभावना तलाशने के लिए अरावा इंस्टीच्यूट फोर एन्वॉयरनमेंटल स्टडीज की स्थापना 1996 में की गई थी। यहां वेस्ट बैंक, जॉर्डन और इजरायल के अलावा अन्य देशों से स्टूडेंट आते हैं। वे पर्यावरण संबंधित विभिन्न विषय-वस्तुओं की पढ़ाई करते हैं, इसके अलावा वे अन्य देशों से जुड़े शोध विषय प्रोजेक्ट की पढ़ाई भी करते हैं। यहां आर्गनिया इस्पिनोसा के पेड़ होते हैं। इसके फल का इस्तेमाल तेल के उत्पादन में होता है। यह दुनिया में सबसे अच्छे खाद्य तेलों में से एक माना जाता है। इस तेल की जरूरत और मांग काफी हैं। आर्गन की खासियत यह है कि यह पेड़ विपरीत जलवायु में भी पैदा होता है।

अरावा में जलवायु संबंधित दिक्कतों के हिसाब से उसके समाधान की तलाश भी की गई। सिंचाई के लिए पानी की समस्या का समाधान किया गया। यहां उगने वाले फल जैसे स्ट्रॉबेरी काफी मीठे होते हैं, साथ ही काफी समय तक ताजे भी रहते हैं। यही वजह है कि यहां खेती करने का फैसला किया गया। यहां मछली का उत्पादन भी किया जाता है। यहां के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अरावा में खेती इजरायली प्रौद्योगिकियों की मदद से संभव हो सकी है। यहां की जलवायु दुनिया में सबसे शुष्क है, इसके बावजूद यहां खेती को संभव बनाया जा सका है।

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