ट्रक ड्राइवर का बेटा है वर्ल़्ड चैंपियन, नंगे पैरों से सीखा हॉकी खेलना

नई दिल्ली (21 दिसंबर): दस साल पहले कुराली के चकवाल सीनियर सकेंडरी स्कूल में पढ़ाई के दौरान हरजीत सिंह ने गोपाल हॉकी अकेडमी में कुछ महीने खेला। उसके बाद वह जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी से जुड़ गया। उन्होंने ही उसे पढ़ाया और इस मुकाम तक पहुंचाया है। शुरू से ही गरीबी के आलम में घर के हालात ऐसे नहीं थे कि हरजीत के हॉकी खेलने के खर्च को वहन पर पाते। यहां तक कि उनके पास खेलने के लिए जूते तक नहीं थे।- हरजीत ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत एवं पग पग पर कोच अमृतपाल तथा पटवारी सोहन सिंह लाल द्वारा प्रदान की गई सहायता के बूते आगे बढ़ता गया।वो आज इस मुकाम तक पहुंच अपने तथा परिवार के सपनों को साकार करने में कामयाबी पाई। यह कहना है वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय जूनियर हॉकी टीम के गांव निहोलका वासी कैप्टन हरजीत सिंह तुली की मां बलविंदर कौर का जो हरजीत की उपलब्धि पर खुद को गौरवांवित महसूस कर रहीं है। हरजीत के पिता पेशे से ट्रक ड्राईवर हैं।