जानिए कौन थे लेनिन, त्रिपुरा में जिनकी मूर्ति तोड़ने पर मचा बवाल

नई दिल्ली ( 6 मार्च ): त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के बाद राज्य के लगभग हर इलाके से तोड़फोड़ और मारपीट की ख़बर आ रही है। साउथ त्रिपुरा डिस्ट्रिक्ट के बेलोनिया सबडिविज़न से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां बुलडोज़र की मदद से रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया गया। इस दौरान भारत माता की जय के नारे भी लगाए गए। 

आइए आपको हम बताते हैं आखिर व्लादिमीर लेनिन कौन थे...

व्लादिमीर लेनिन रूसी क्रांति के नायक थे, इनका पूरा नाम व्लादिमीर इलीइच लेनिन था, जिनका जन्म सिंविर्स्क में हुआ था और उनका असल नाम "उल्यानोव" था। व्लादिमीर इलीइच लेनिन (1870-1924) रूस में बोल्शेविक क्रांति के नेता एवं रूस में साम्यवादी शासन का संस्थापक थे। लेनिन के पिता विद्यालयों के निरीक्षक थे। ग्रेजुएट होने के बाद भी लेनिन ने 1887 में कजान विश्वविद्यालय के विधि विभाग में एडमिशन लिया, लेकिन विद्यार्थियों के क्रांतिकारी प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण विश्वविद्यालय ने निष्कासित कर दिया।

साल 1889 में उन्होंने स्थानीय मार्क्सवादियों का संगठन बनाया। उसके बाद उन्होंने वकालात शुरू की और मार्क्सवादियों के नेता बने। अपनी क्रांति के दौरान उन्हें जेल में भी जाना पड़ा और उन्होंने कई किताबें भी लिखी। मार्क्सवादी विचारक लेनिन के नेतृत्व में 1917 में रूस की क्रांति हुई थी। रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक पार्टी) के संस्थापक लेनिन के मार्क्सवादी विचारों को 'लेनिनवाद' के नाम से जाना जाता है।

उस दौरान लोगों के दिल में विश्वयुद्ध को लेकर बहुत गुस्सा था। उसके बाद बोलशेविक खेमे के लोग सरकार के खिलाफ उतर आए। धीरे-धीरे बोलशेविकों ने सरकारी इमारतों में कब्जा करना शुरू कर दिया। इस तरह से सत्ता में बोलशेविक काबिज हो गए। ये रूसी क्रांति थी, जिसने रूस का भविष्य बदल दिया और बोलशेविक सत्ता में आए और व्लादिमीर लेनिन सत्ता में आए।

लेनिन ने बतलाया था कि मजदूरों का अधिनायकतंत्र वास्तव में अधिकांश जनता के लिए सच्चा लोकतंत्र है। उनका मुख्य काम दबाव या जोर जबरदस्ती नहीं बल्कि संघटनात्मक और शिक्षण संबंधी कार्य है। बाहरी देशों के सैनिक हस्तक्षेपों और गृहकलह के तीन सालों 1928-20 में लेनिन ने विदेशी आक्रमणकारियों और प्रतिक्रांतिकारियों से दृढ़तापूर्वक लोहा लेने के लिए सोवियत जनता का मार्ग दर्शन किया। इसके कारण 1922 में सोवियत संघ की स्थापना हुई।

उन्हें इतिहास के सबसे महान क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है। 54 साल की उम्र में स्ट्रोक की वजह से उनका निधन हो गया।