तीन तलाक पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने SC में दिया नया हलफनामा

नई दिल्ली (22 मई): तीन तलाक के मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में 13 पन्ने का हलफनामा दाखिल किया है। इस हलफनामे में बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो काजियों से कहेगा कि तीन तलाक की प्रथा को बढ़ने से रोकें। हलफनामे के जरिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ये कहने की कोशिश की है कि वो निकाह और तलाक के मामलों में खुद पहल करेगा किसी दूसरी संस्था या सरकार को इसमें दखल देने का विरोध करेगा।


बोर्ड ने कहा है कि वह इस मामले में लोगों को जागरुक बनाने का प्रयास करेगा। लड़की चाहे तो निकाहनामे में तीन तलाक से मना किए जाने का प्रस्ताव जोड़ सकती है। साथ ही बोर्ड ने कहा है कि वह निकाह कराने वाले व्यक्तियों के लिए कुछ सलाह जारी करेगा।

 

बोर्ड ने ऐसे समय में हलफनामा दिया है, जब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ इस मामले में सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा था कि अगर कोर्ट तीन तलाक को खत्म करता है, तो केंद्र इस मामले में नया कानून लाएगा। हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मामले में केंद्र सरकार का विरोध करते हुए तीन तलाक को निजी आस्था का मामला बताते हुए कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देने की अपील की थी।


सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा था अगर मुस्लिम समुदाय खुद ही इस प्रथा को खत्म नहीं करता है तो वह केंद्र कानून बनाकर इस प्रथा को खत्म कर देगा। तीन तलाक को लेकर प्रधानमंत्री मोदी भी मुस्लिम समुदाय से मामले का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि मुसलमानों को खुद ही इस प्रथा को खत्म करने के लिए आगे आना होगा।