सऊदी अरब जैसे देश तीन तलाक को खत्म सकते हैं, तो हम क्यों नहीं: मुकुल रोहतगी

नई दिल्ली ( 15 मई ): सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को चौथे दिन ट्रिपल तलाक मामले पर सुनवाई जारी रही। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि "मुस्लिमों में निकाह हलाला और बहुविवाह (पॉलीगैमी) प्रथा पर भी सुनवाई होनी चाहिए।" इस पर कोर्ट ने कहा, "हमारे पास वक्त कम है। लिहाजा ट्रिपल तलाक पर ही सुनवाई होगी। इस मामले पर सुनवाई बाद में होगी।"


शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मुस्लिमों में ट्रिपल तलाक शादी तोड़ने का सबसे बदतर तरीका है। बता दें कि चीफ जस्टिस जीएस खेहर की अगुआई में 5 जजों की संवैधानिक बेंच मामले की सुनवाई कर रही है।


सरकार का पक्ष रखते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि मुस्लिमों में निकाह हलाला और बहुविवाह (पॉलीगैमी) प्रथा पर भी सुनवाई होनी चाहिए। जिस पर अभी हमारे पास वक्त कम है। इसलिए ट्रिपल तलाक पर ही सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक, लीबिया, मिस्र और सूडान जैसे देश तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर चुके हैं, तो हम क्यों नहीं कर सकते।


आपको बता दें कि ट्रिपल तलाक को लेकर 11 मई से सुनवाई चल रही है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ ये समीक्षा करेंगे कि तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं। कोर्ट इस मुद्दे को इस नजर से भी देखेगा कि क्या तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन हो रहा है या नहीं।


सुनवाई के दौरान सीनियर वकील राम जेठमलानी भी तीन तलाक की एक पीड़िता की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 सभी नागरिकों को बराबरी का हक देते हैं और इनकी रोशनी में तीन तलाक असंवैधानिक है। जेठमलानी ने दावा किया कि वो बाकी मजहबों की तरह वो इस्लाम के भी छात्र हैं। उन्होंने हजरत मोहम्मद को ईश्वर के महानतम पैगंबरों में से एक बताया और कहा कि उनका संदेश तारीफ के काबिल है।


पिछली सुनवाई में जेठमलानी ने कहा था कि , 'कुरान कहता है कि आप अगर ज्ञान की तलाश में हैं तो अल्लाह की राह पर हैं। जेठमलानी की राय में महिलाओं से सिर्फ उनके लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं हो सकता और सुप्रीम कोर्ट में तय होने वाला कोई भी कानून भेदभाव को बढ़ावा देने वाला नहीं होना चाहिए।


बहस की शुरुआत एक याचिकाकर्ता शायरा बानो के वकील ने की थी। उनका कहना था कि तीन तलाक इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। ज्यादातर मुस्लिम देशों ने तीन तलाक को खत्म कर दिया है। इन देशों में तलाक के लिए न्यायिक आदेश जरूरी हैं। तलाक एकतरफा नहीं हो सकता।


आपको बता दें कि पहले से तय समय के मुताबिक सुनवाई 19 मई तक जारी रहेगी. इस दौरान बेंच रोजाना इस मामले पर सुनवाई करेगी.