तीन तलाक लोकसभा में पास, जानें क्या कहता है राज्यसभा का गणित

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 दिसंबर): केंद्र सरकार ने तीन तलाक बिल को लोकसभा में पास करा लिया। 5 घंटे तक लोकसभा में चली चर्चा के बाद इस बिल के पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े, जबकि वोटिंग के दौरान कांग्रेस, एआईएडीएमके, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने वॉक आउट कर दिया। बिल लोकसभा में तो पास हो गया, लेकिन एआईएडीएमके के वॉक आउट करने के बाद यह मोदी सरकार के लिए राज्यसभा में पास करना काफी मुश्किल लग रहा है।

पिछली बार जब यह बिल राज्यसभा में आया था तो इसे कुछ संशोधन के साथ सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया था। हालांकि इस विधेयक का कांग्रेस ने समर्थन किया था, लेकिन उसकी मांग थी कि बिल में कुछ अहम संशोधन किए जाएं। अब जब तीन तलाक विधेयक दोबारा लोकसभा में आया तो कांग्रेस इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए वॉक आउट कर गई। कांग्रेस का वॉकआउट करना सरकार के लिए इतना बड़ा मसला नहीं है जितना कि एआईएडीएमके के वॉकआउट करने का है, क्योंकि अक्सर यह देखा गया है कठिन परिस्थितियों एआईएडीएमके ने सरकार का साथ दिया है।

क्या कहता है राज्यसभा का गणित ?

राज्यसभा में फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 86 सांसद हैं, जिसमें बीजेपी के 73, जेडीयू के 6, शिवसेना के 3, अकाली दल के 3 और आरपीआई के 1 सांसद शामिल हैं। वहीं विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस के 50, समाजवादी पार्टी के 13, टीएमसी के 13, सीपीएम के 5, एनसीपी के 4, एनसीपी के 4, बीएसपी के 4, सीपीआई के 2 और पीडीपी के 2 सांसद शामिल हैं। इसका मतलब विपक्ष के पास सरकार से ज्यादा सांसद हैं।

हालांकि राज्यसभा में वो दल भी हैं जो किसी खेमे में नहीं है और हालात देखकर अपना रुख तय करते हैं उनमें टीआरएस के 6, बीजेडी के 9 और एआईएडीएमके के 13 सांसद हैं। अब लोकसभा से वॉकआउट करने के बाद सरकार के समक्ष सवाल खड़ा हो गया कि उच्च सदन में एआईएडीएमके का क्या रुख रहेगा।

तीन तलाक पर अबतक...

- 16 महीने पहले आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

- तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था

- अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था

- सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कानून बनाने को कहा था

- सरकार ने लोकसभा से मुस्लिम महिला विधेयक पारित कराया

- लोकसभा में 28 दिसंबर 2017 को पास किया गया था

- विधेयक को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया था

- 10 अगस्त 2018 को बिल राज्यसभा में  पारित नहीं हो सका

- राज्यसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है

- राज्यसभा ने विधेयक को कुछ संशोधनों के साथ वापस कर दिया

- विपक्ष की मांग थी कि आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान हो

- विपक्ष की मांग पर विधेयक में जमानत का प्रावधान जोड़ा गया

- बिल में पहले जमानत का प्रावधान नहीं था

- 19 सितंबर 2018 को सरकार ट्रिपल तलाक़ पर अध्यादेश लाई

- विपक्ष की मांग के बाद सरकार ने बिल में तीन संशोधन किए

- संशोधन के बाद विपक्ष विधेयक पर चर्चा को तैयार हुआ

- सरकार इस एक बार फिर लोकसभा में पास कराने में कामयाब रही