तीन तलाक बिल घर में नारी के सम्मान का मामला, सियासत के तराजू पर नहीं तौले: रविशंकर प्रसाद

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (27 दिसंबर): 
तीन तलाक बिल को लेकर संसद में बहस चल रही है। बीजेपी सरकार जहां इस बिल को पास कराने को लेकर अड़ी हुई है, वहीं विपक्षी पार्टियां इसे ज्वाइंट सेलेक्ट कमेटी में भेजने को लेकर आवाज बुलंद कर रही है। बीजेपी सरकार का कहना है कि उन्होंने इस बिल में वह सभी बदलाव कर दिए हैं, जिनको लेकर विपक्षी पार्टियां मांग कर रही थी, ऐसे में इसका विरोध करना सिर्फ महिलाओं के सम्मान के खिलाफ होगा।

इसपर सरकार की तरफ से सदन में बोलते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक बिल किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को सम्मान देने से जुड़ा है और कांग्रेस पहले इस बिल पर चर्चा के लिए तैयार थी। जब दिसंबर में बिल लाए थे तब भी बिल लोकसभा में पास हुआ था, लेकिन राज्यसभा से लौट गया था। विपक्ष की कई सिफारिशों के मुताबिक बिल में बदलाव भी किए गए हैं और पीड़ित महिला के अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित किए गए हैं।

कानून मंत्री ने कहा कि इस मामले को सियासत के तराजू पर नहीं इंसाफ के तराजू पर तौला जाना चाहिए, यह घर में नारी के सम्मान का मामला है। क्या राजनीतिक कारणों से तीन तलाक की पीड़ित महिलाओं के पक्ष में कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। यह बिल महिलाओं के न्याय से जुड़ा है और सदन को एक सुर में बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि हम संसद से अपील करेंगे कि वह तीन तलाक के खिलाफ बिल पारित करे। एक आंकड़े के मुताबिक जनवरी 2017 से लेकर 10 दिसंबर तक देश में 477 तीन तलाक हुए हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे

लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि तीन तलाक बिल बहुत जरूरी बिल है और इस बिल के ज्वाइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए, क्योंकि सरकार किसी धार्मिक मामले में हस्तक्षेप कर रही है। खड़गे ने कहा कि इस बिल से करीब 30 करोड़ महिलाएं प्रभावित होंगी और उनकी रक्षा जरूरी है। कांग्रेस, टीएमसी समेत कई अन्य दलों के सांसद तीन तलाक बिल को ज्वाइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहे हैं।

असदुद्दीन ओवैसी

वहीं इस मामले में लोकसभा में AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सरकार ने कई स्टेक होल्डर्स से बिल के बारे में उनका पक्ष नहीं जाना है। कई अन्य दलों के सांसद भी बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहे हैं। इस पर संसदीय कार्यमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस बिल को रोकना ठीक नहीं है और इसपर चर्चा होनी चाहिए।

क्या हैं तीन बदलाव...

पहला संशोधन:

पहले का प्रावधान- इस मामले में पहले कोई भी केस दर्ज करा सकता था. इतना ही नहीं पुलिस संज्ञान लेकर मामला दर्ज कर सकती थी।

अब संशोधन के बाद- अब पीड़िता, सगे रिश्तेदार ही केस दर्ज करा सकेंगे।

दूसरा संशोधन:

पहले का प्रावधान-पहले गैर जमानती अपराध और संज्ञेय अपराध था। पुलिस बिना वॉरंट के गिरफ्तार कर सकती थी।

अब संशोधन के बाद- मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा।

तीसरा संशोधन:

पहले का प्रावधान- पहले समझौते का कोई प्रावधान नहीं था।

अब संशोधन के बाद-मजिस्ट्रेट के सामने पति-पत्नी में समझौते का विकल्प भी खुला रहेगा।

तीन तलाक पर अबतक...

- 16 महीने पहले आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

- तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था

- अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था

- सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कानून बनाने को कहा था

- सरकार ने लोकसभा से मुस्लिम महिला विधेयक पारित कराया

- लोकसभा में 28 दिसंबर 2017 को पास किया गया था

- विधेयक को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया था

- 10 अगस्त 2018 को बिल राज्यसभा में  पारित नहीं हो सका

- राज्यसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है

- राज्यसभा ने विधेयक को कुछ संशोधनों के साथ वापस कर दिया

- विपक्ष की मांग थी कि आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान हो

- विपक्ष की मांग पर विधेयक में जमानत का प्रावधान जोड़ा गया

- बिल में पहले जमानत का प्रावधान नहीं था

- 19 सितंबर 2018 को सरकार ट्रिपल तलाक़ पर अध्यादेश लाई

- विपक्ष की मांग के बाद सरकार ने बिल में तीन संशोधन किए

- संशोधन के बाद विपक्ष विधेयक पर चर्चा को तैयार हुआ