त्रम्ब्केश्वर मंदिर के पंडितों पर छापा, शिवसेना ने कहा- मोदी सरकार को लगेगा पुरोहितों का श्राप

नई दिल्ली ( 30 दिसंबर ): शिवसेना ने मुख्यपत्र 'सामना' में त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पुरोहितों पर आयकर विभाग के छापेमारी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सामना ने सरकार से सवाल किया है कि क्या काला पैसा हिंदुओं के पास है, देश में मुस्लिम और ईसाई भी हैं। उन पर कार्रवाई की हिम्मत किसी ने क्यों नहीं दिखाई?

सामना के संपादकीय में छपे एक लेख, जिसका शीर्षक 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं', में लिखा गया है कि काला पैसा समाज और अर्थव्यवस्था को लगा दीमक ही है। उसे निकालना ही चाहिए, लेकिन पर काला पैसा बाहर निकालने के लिए सरकारी तंत्र कब किसके घर में घुस जाएगा, यह तय नहीं है।

मुखपत्र में लिखा गया है कि हिंदुस्तान में फिलहाल काले धन के विरुद्ध लड़ाई जारी है, पर काला पैसा बाहर निकालने के लिए सरकारी तंत्र कब किसके घर में घुस जाएगा, यह तय नहीं है। अब आयकर विभाग द्वारा त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पुरोहितों के जनेऊ पर ही हाथ डालने से महाराष्ट्र का समस्त पुरोहित वर्ग सरकार को श्राप दे रहा होगा। सच में तो काला पैसा जमा करने के लिए आयकर विभाग द्वारा त्र्यंबकेश्वर के पुरोहितों के यहां छापा मारना असल में एक पहेली ही है, क्योंकि काला पैसा निश्चित किसके पास है? ऐसा प्रश्न खड़ा हो रहा है?

लेख में टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि महाराष्ट्र से लेकर देश के कोने-कोने में जो मदरसे और मस्जिदें खड़ी हैं। उनकी भव्यता आश्चर्यचकित करनेवाली है। इस्लामी देशों से इसके लिए भरपूर विदेशी मुद्रा आ रही है। विदेशों से आनेवाले इस धन का हिसाब मांगने के लिए मदरसों और मस्जिदों पर आयकर विभाग के शूरवीर अधिकारी छापा मारेंगे क्या? इतनी हिम्मत इन लोगों में निश्चित ही नहीं है।

सामना के मुताबिक काला पैसा यह सिर्फ मंदिर के पुरोहित के पास ही है। यह खोज करके मोदी सरकार ने खुद के धर्मनिरपेक्ष होने की भी बात जाहिर कर दी है, लेकिन जिस तरह के छापे हिंदू पुरोंहितों के घरों पर पड़े हैं, वैसे छापे ईसाई पुरोंहितों के घरों पर डालने कि हिम्मत किसी ने दिखाई नहीं। हमें किसी पर ओरोप नहीं लगाना है, जो मन में आया वो सहज कह दिया। मुसलमानों के संबध में ओर क्या कहें! विशिष्ट प्रकार के मस्जिदों में कट्टर शक्तियों को भारी अर्थपूर्ति होती ही है।

केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश के मंदिरो मे काफी संपत्ति और सोना है। इसे हिंदुओं के सभी देवताओं को गुनहगार बताकर 'धर्मनिरपेक्षवाद' का झाझ बजाया जाएगा। क्योंकि 'नोटबंदी' के बाद जो काले धन के विरुद्ध लड़ाई शुरू हुई उसका सबसे ज्यादा फटका हिंदुओं को ही लग रहा है।

अब सवाल उठता है की काला पैसा किसके पास है सवाल इसलिए है, क्योंकि महाराष्ट्र साधु संतों और देवी देवताओं की भूमि है। शिर्डी से पंढरपुर और अष्टविनायक तक एसे अनेक धर्मस्थान हैं, वहां हज़ारों लोग पुरोहिताई करते हैं। क्या कल उन सभी जगहों पर पुरोहितों के यहां जांच होगी।