तिरंगे के जनक को सलाम...

नई दिल्ली (2 अगस्त): तिरंगा देखते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, लेकिन इसके डिजाइन को तैयार करने वाले गुमनाम हीरो पिंगाली वेंकैया के बारे में लोग नहीं जानते। वेंकैया को जीते-जी वह अपेक्षित सम्‍मान मयस्‍सर नहीं हुआ, जिसके वह हकदार थे। वह गुमनामी के अंधेरे में कहीं खो गया, आज यानी दो अगस्‍त को तिरंगे की डिजाइन तैयार करने वाले उसी गुमनाम हीरो पिंगाली वेंकैया का जन्‍मदिन है।

जाने कौन थे गुमनाम हीरो पिंगाली वेंकैया:

- दो अगस्‍त, 1876 को राष्‍ट्रीय ध्वज के डिजाईन तैयार करने वाले स्वर्गीय पिंगली वेंकैया का जन्म आन्ध्र प्रदेश के कृष्‍णा जिले के "दीवी" तहसील के "भटाला पेनमरू" नामक गांव में हुआ। - उनके पिता का नाम पिंगली हनमंत रायडू एवं माता का नाम वेंकटरत्‍न्‍म्‍मा था। - पिंगली वेंकैय्या ने प्रारंभिक शिक्षा भटाला पेनमरू एवं मछलीपट्टनम से प्राप्त करने के बाद 19 वर्ष कि उम्र में मुंबई चले गए। - 19 साल की अवस्‍था में उन्‍होंने ब्रिटिश आर्मी को ज्‍वाइन किया, जहां से उन्हें दक्षिण अफ्रीका भेज दिया गया। - जापानी, उर्दू समेत कई भाषाओं के जानकार पिंगाली की महात्‍मा गांधी से मुलाकात दक्षिण अफ्रीका में एंग्‍लो-बोअर युद्ध के दौरान हुई। - उसके बाद वह स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी बने और महात्‍मा गांधी से उनका नाता 50 से भी अधिक वर्षों तक बना रहा।

कैसे बना तिरंगा:

- 1916-21 के पांच वर्षों के दौरान 30 देशों के राष्‍ट्रीय ध्‍वज पर पिंगाली वेंकैया ने गहराई से शोध किया। - 1921 में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के सम्‍मेलन में उन्‍होंने राष्‍ट्रीय ध्‍वज की अपनी संकल्‍पना को पेश किया - उसमें दो रंग लाल और हरा क्रमश: हिंदू और मुस्लिम दो प्रमुख समुदायों का प्रतिनिधित्‍व करते थे। - बाकी समुदायों के प्रतिनिधित्‍व के लिए महात्‍मा गांधी ने उसमें सफेद पट्टी का समावेश करने के साथ राष्‍ट्र की प्रगति के सूचक के रूप में चरखे को शामिल करने की बात कही। - 1931 में इस दिशा में अहम फैसला हुआ। तिरंगे को राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाने का प्रस्‍ताव पारित हुआ। - उसमें मामूली संशोधनों के रूप में लाल रंग का स्‍थान केसरिया ने लिया। - इसको 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा ने राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अंगीकार किया और आजादी के बाद यही तिरंगा हमारी अस्मिता का प्रतीक बना। - बाद में रंग और उनके अनुपात को बरकरार रखते हुए चरखे की जगह केंद्र में सम्राट अशोक के धर्मचक्र को शामिल किया गया।

कैसे गुजरा जीवन: - इस असाधारण योगदान के बावजूद 1963 में पिंगाली वेंकैया का बेहद गरीबी की हालत में विजयवाड़ा में एक झोपड़ी में देहावसान हुआ। - वर्षों बाद 2009 में उन पर एक डाक टिकट जारी हुआ और इस साल जनवरी में केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने विजयवाड़ा के ऑल इंडिया रेडियो बिल्डिंग में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया।