होली विशेषः यहां रंगों के साथ खेली जाती है पत्थरमार होली

नई दिल्ली (13 मार्च): देश के सभी क्षेत्रों में रंगों से होली मनाई जाती है, लेकिन राजस्थान के आदिवासी गांवों में महज एक मान्यता के चलते होली के मौके पर खून-खराबा होता है।

राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की इस अजीब मान्यता के चलते प्रतिवर्ष होली के दिन कई लोग घायल होते है। डूंगरपुर के गांव भीलूड़ा एवं रामगढ़ में तो होली के मौके पर एंबुलेंस 108 लगाई जाती है। 

 

यहां कई लोग अस्पताल पहुंच जाते हैं। लोगों ने पत्थर इकट्ठा कर लिए हैं। ये खेल होलिका दहन के बाद रात से ही शुरू होता है तो धूलंडी तक चलता है। माहौल में वीर रस भरने के लिए ढोल और चंग बजने लगते हैं। इस होली को लोग राड़ की होली कहते हैं, राड़ यानी दुश्मनी। स खेल में जो भी जितना घायल होता है, वो अपने आप को उतना ही भाग्यशाली समझता है। कुछ घायलों का स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया जाता है और गंभीर रूप से घायल लोगों को भर्ती तक करना पड़ता है। जमीन पर जगह-जगह खून के धब्बे फैल जाते हैं।