लकड़ी बेचने वाली के बेटे ने पास किया JEE एडवांस, अब पढेगा IIT में

नई दिल्ली(15 जून): एक मां की मेहनत आखिरकार रंग लाई है। पैदा होने के दस माह बाद ही पिता की मौत के बाद जिस बेटे को मां ने जंगल से लकडिय़ां बेचकर पढ़ाया अब उसका चयन देश में इंजीनियरिंग के अग्रणी संस्थान के लिए हुआ है। किरंदुल, पटेलपारा के आदिवासी छात्र वामन मंडावी ने मां के आर्शीवाद व अपने मेहनत के बलबूते जेईई एडवांस की परीक्षा पास कर ली है।

- दंतेवाड़ा जिले से चयनित छह छात्रों में वह भी शामिल है। बेटे की उपलब्धि से बेहद खुश मां मंगली ने बताया, वामन के पिता चमरूराम की मौत वामन के जन्म लेने के 10 माह बाद ही हो गई। इसके बाद बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी सिर पर आई तो जंगल से लकडिय़ां इकट्ठा कर बेचना शुरू किया और इससे मिलने वाले पैसों से बच्चों को पढ़ाया। मेरा सपना था कि बच्चे पढ़ लिखकर बड़े आदमी बने। मैंने बच्चों को लगातार स्कूल भेजा। वामन की इस कामयाबी में जिला प्रशासन सहित नि:शुल्क शिक्षा योजना का बड़ा योगदान रहा।

- वामन ने बताया, बचपन से वह मां को मेहनत करते देखता आया है। मां से ही उसे प्रेरणा मिली। मां कभी स्कूल नहीं गई पर वह शिक्षा का महत्व जानती थी और कभी भी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। पिता को कभी देखा नहीं, मां ने ही पिता की जिम्मेदारी भी संभाली। मेरी मां ने तकलीफ उठाकर मुझे पाला और पढ़ाया है। मैं अब मां के सपने को पूरा करना चाहता हूं। इंजीनियर बन कर मां के साथ देश की सेवा करना चाहता हूं।

- वामन का बचपन अभावों में बीता पर प्रतिभा अमीरी की मोहताज नहीं होती। पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में की और वह हमेशा अव्वल आते रहा। बड़े बचेली से हाईस्कूल की पढ़ाई की। दसवीं 72 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण की। इसके बाद दंतेवाड़ा के छू लो आसमान में विज्ञान संकाय से 12 वीं में 76 प्रतिशत अंक लाए।