ट्रक-बसों के बेकार टायरों से बनेंगे ट्रेंडी शू वियर

नई दिल्ली (15 मई): ट्रक, बस और कारों से निकले पुराने टायर अब सिर दर्दी बढ़ाने वाला कचरा नहीं बल्कि पैसे देने वाला रॉ मैटेरियल बन गया है। जी हां, सिर दर्दी वाले कचरे से पैसे कमाने वाला रॉ मैटेरियल बनाने का कारनामा कर दिखाया है मुंबई के एक एमबीए कपल ने। जे रेज और जोत्सना ने पादुक डॉट कॉम के नाम से ऑनलाइन फुटवेअर शोरूम की शुरुआत की, जो खराब हो चुके टायर से जूते बनाते हैं।


जे रेज एमबीए करने के कुछ साल बाद तक फॉरन एजुकेशन की इच्छा रखने वालों के लिए कंसल्टेंसी चलाते थे। शादी के बाद पत्नी जोत्सना के साथ मुंबई के चेंबुर इलाके से ऑनलाइन फुटवेअर शोरूम की शुरुआत की। इस ऑनलाइन प्लैटफॉर्म का नाम रखा गया पादुक्स। कमाल की बात यह है कि इस प्लैटफॉर्म पर सिर्फ बेकार हो चुके टायर से बने फुटवेअर ही मिलते हैं। कई अलग रंग और डिजाइन में बने इन जूते-चप्पलों की काफी डिमांड बढ़ गई है। ऑनलाइन प्लैटफॉर्म के साथ कुछ स्टोर्स पर भी ये फुटवेअर आपको मिल सकते हैं।


जे ने बताया, 'हमने 2013 में पादुक की शुरुआत की थी। मैं इंटरनेट पर ब्राउज़िंग कर रहा था, तभी मैंने एक शख्स के बारे में पढ़ा जो इंडोनेशिया से बेकार हो चुके टायर इम्पोर्ट करता है। इन टायरों को वह जूतों के सोल बनाने में इस्तेमाल करता था और फिर उन्हें यूएस में बेचता था। हमें आइडिया बेहद पसंद आया और हमने भारत में ऐसा ही कुछ करने का फैसला लिया।' जहां जूतों के सोल के लिए टायर कबाड़ी की दुकान से मिल जाते थे, वहीं जूते के अंदर और बाहर के डिजाइन के लिए कपड़ा और दूसरी चीजें हम लोकल मार्केट से खरीद लेते थे। और इन जूतों की कीमत हमने 399 रुपये से 1100 रुपये तक रखी।