जन्म के समय थे 'मर्द', अब रियो ओलंपिक में 'महिला' एथलीट कम्पटीशन की तैयारी

नई दिल्ली (3 जुलाई): बतौर पुरुष जन्मे दो ब्रिटिश एथलीट्स अब इतिहास रचने जा रहे हैं। ये दोनों ही अगले महीने होने जा रहे ओलंपिक गेम्स में वीमेन्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं। 

'मेलऑनलाइन' की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी इन दोनों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन अगर इनका चयन हो जाता है, तो ये दुनिया के पहले ट्रांसजेंडर होंगे जो रियो ओलंपिक्स में हिस्सा लेंगे।

ब्रिटिश स्पोर्ट्स फैन्स के लिए चिंता का विषय ये है कि कहीं अगर इनकी पहचान का खुलासा हो गया, तो डर है कि कहीं वे एक्सपोज़ ना हो जाएं। इसके अलावा कहीं ओलंपिक स्पॉटलाइट में उनका मज़ाक ना बने। इसके अलावा कहीं, उन्हें मेडल जीतने की स्थिति में शायद ड्रॉप बैक करना हो। 

जीबी टीम में शामिल किए जाने को उल्लेखनीय तौर पर मानवाधिकारों की जीत माना जा रहा है। लेकिन इसपर विवाद भी पैदा हो सकता है। आलोचकों की दलील है कि मेल-टू-फीमेल कम्पटीशन बॉयोलॉजिकल तौर पर अनफेयर होगा। क्योंकि, साइज़, मसल मास और फेफड़ों की क्षमता में फर्क होगा।

कई स्पोर्टिंग बॉडीज़ में ट्रांसजेंडर मामलों की सलाहकार डेलिया जॉन्सटन ने बताया कि ये जोड़ी पहले ब्रिटेन में एक यूरोपियन चैम्पियनशिप स्पोर्टिंग ईवेंट में हिस्सा ले चुकी है। उन्होंने इनमें से एक को ओलंपिक मेडल जीतने योग्य व्यक्ति बताया है। उनके जेंडर स्टेटस के बारे में स्पोर्ट्स गवर्निंग ऑर्गनाइज़ेशन्स को ही जानकारी है, लेकिन विरोधी राष्ट्रों को इसकी जानकारी नहीं है। 

बताया जा रहा है, इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी अपनी गाइडलाइंस में बदलाव का जल्द ही खुलासा कर सकती है। जिसमें ट्रांसजेंडर एथलीट्स के लिए उम्मीद जगती दिख रही है।

बता दें, हर ओलंपिक टीम में स्पोर्ट गवर्निग बॉडी शुरुआती तौर पर सलेक्शन करती है। इसके बाद नॉमिनीज़ को ब्रिटिश ओलंपिक एसोसिएशन (BOA) पैनल को फैसला करने के लिए भेजा जाता है।

अभी यह जानकारी नहीं है कि इन दोनों को स्पोर्टिंग बॉडीज़ के लिए नॉमिनेट किया गया है या नहीं। जॉन्सटन ने बताया कि नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन्स उनके जेंडर हिस्ट्री के बारे में अवगत हैं। 

हालांकि, रियो के लिए इन दोनों ट्रांसजेंडर महिलाओं के चयन को लेकर BOA ने कोई टिप्पणी नहीं की है।