पेशे से मजदूर और खातों से करोड़ों का लेन-देन!

नई दिल्ली(7 अगस्त): मध्यप्रदेश के कटनी जिले में कई दिहाड़ी मजदूर फर्जी कंपनियों के निदेशक बना दिए गए हैं और उनके बैंक खातों से करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। यह खुलासा तब हुआ, जब आयकर विभाग का नोटिस उन तक पहुंचा। इन नोटिस में आय का स्रोत पूछा गया था। पुलिस को अंदेशा है कि फर्जी कंपनियों के जरिए हवाला हुआ है। यहां गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले दो दिहाड़ी मजदूरों को फर्जी कंपनियां का निदेशक बनाकर करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया है।

- इन बैंक खातों से देश के विभिन्न स्थानों पर राशि का आहरण किया गया है। पेशे से इलेक्ट्रीशियन रजनीश तिवारी रोजाना लगभग 200 रुपये कमाते हैं, मगर एक बैंक में उनके नाम का खाता एसके मिनरल्स कंपनी के निदेशक के तौर पर है।

- इस खाते से वर्ष 2006 से 2010 की अवधि में लगभग 16़93 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। उन्हें इस बात का तो पता तब चला, जब उनके पास आयकर विभाग का नोटिस पहुंचा। नोटिस में आय का ब्योरा न दिए जाने की बात कही गई है, साथ ही आय का स्रोत पूछा गया है।

- इसी तरह एक निजी क्लीनिक में बतौर लैब असिस्टेंट का काम करने वाले उमा दत्त हलदकार का भी एक बैंक में खाता खोला गया है। वह महज चार हजार रुपये प्रति माह कमाते हैं, मगर महादेव ट्रेडिंग कंपनी के निदेशक हैं। उनके खाते से लगभग दो करोड़ 27 लाख रुपये का लेन-देन हुआ है। इन दोनों व्यक्तियों को जब आयकर का नोटिस मिला तो वे भौंचक रह गए और उन्होंने कोतवाली थाने में लिखित आवेदन दिया कि वे किसी कंपनी के निदेशक नहीं हैं, बल्कि दिहाड़ी मजदूर के तौर पर अपना जीवन चला रहे हैं।

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