अब कोहरा नहीं रोक पाएगा रेल की रफ्तार!

कुंदन सिंह, नई दिल्ली (14 जुलाई): हिंदुस्तान में ट्रेनों की लेट-लतीफी कोई नई बात नहीं है। सर्दियों में कोहरे के दौरान रेल मुसाफिरों की मुसीबत कोहरा और बढ़ा देता है। ट्रेन घंटों लेट चलती हैं। लेकिन अब ट्रेनों को एक ऐसी तकनीक से लैस करने की तैयारी है..जिससे घने कोहरे में भी ड्राइवर को आसानी से रेलवे ट्रैक दिखाई देगा।  

भारतीय रेल की सुस्त रफ्तार को बढ़ाने के लिए मोदी सरकार लगातार काम कर रही है। हिंदुस्तान की पहली सेमी बुलेट ट्रेन टैग्लो का भी लगातार ट्रायल चल रहा है। लेकिन, रेलवे अच्छी तरह से जानता है कि कोहरा भारतीय ट्रेनों की रफ्तार बैलगाड़ी जैसी बना देता है। ऐसे में अब ट्रेनों में तीसरी आंख लगाने की तैयारी चल रही है।

ट्रेनों में अब तीसरी आंख या त्रिनेत्र लगाने की तैयारी है। जिसकी मदद से 4 से 5 किलोमीटर की रेंज में ट्रैक का हाल साफ-साफ इंजन में लगे खास स्क्रीन पर देखा जा सकेगा। इससे कोहरे में भी ट्रेनों की रफ्तार सुस्त नहीं होगी । इस साल जनवरी में लखनऊ-दिल्ली रूट पर त्रिनेत्र का ट्रायल भी हो चुका है। 

रेल मंत्रालय ने त्रिनेत्र के लिए 15 जुलाई तक एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट मांगा है। जिसमें 6 कंपनियों ने रुचि दिखाई है, जिनमें से एक भारतीय कंपनी भी है। रेलवे ने जो मानक तय किए हैं- उसके मुताबिक,

* जीरो विजिबिलिटी में भी त्रिनेत्र से 1 किलोमीटर तक बीच में आने वाली हर चीज़ का पता चल सकेगा  * तकनीक से ड्राइवर को कम से कम डिस्ट्रेक्शन हो * रास्ते में आने वाली दिक्कतों के लिए झूठा अलार्म न बजे.

ट्रेन में लगनेवाली ये खास तकनीक बिल्कुल उसी तरह काम करेगी, जैसे लड़ाकू विमान और वॉरशिप में लगे डिवाइस काम करते हैं। फिलहाल ये तकनीक ट्रैन के सीधे रास्तों पर ही काम कर सकती है और दूसरा ये कैमरे रस्ते में आने वाले अवरोधों की कलर पिक्चर नहीं ले सकतें, इसलिए सिग्नल लाल है या हरी इसको पढ़ने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। फ़िलहाल रेलवे ने इन समस्यओं से निपटने के लिए  कंपनी से ही सुझाव माँगा है।