CAG रिपोर्ट: 'प्रभू' के ट्रेन में नहीं मिलता है इंसानों के खाने लायक खाना

 

नई दिल्ली (21 जुलाई): ट्रेन में खाने को लेकर लोगों की समस्या नई नहीं है। देश में सरकारें आईं गईं। नए रेल मंत्री बने लेकिन ट्रेनों में मिलने वाले खाने का स्तर नहीं सुधरा। इस बात की तस्दीक CAG रिपोर्ट में भी हुआ है। CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्रेन का खाना इंसानों के खाने के योग्‍य नहीं है। 

CAG रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेनों और स्टेशनों पर परोसी जा रही चीजें प्रदूषित हैं। डिब्बाबंद और बोतलबंद चीजों को एक्सपायर होने के बावजूद भी बेचा जा रहा है। इसके अलावा, अनाधिकृत ब्रैंड की पानी की बोतलें बेची जा रही हैं। जांच में पाया गया कि रेल परिसरों में साफ सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। इसके अलावा, ट्रेन में बिक रहीं चीजों का बिल न दिए जाने और फूड क्वॉलिटी में कई तरह की खामियों की भी शिकायतें हैं।

CAG और रेलवे की जॉइंट टीम ने 74 स्टेशनों और 80 ट्रेनों का दौरा कर जायजा लिया जहां उन्हें रेलवे की खामियां नजर आई। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि पेय पदार्थों को तैयार करने के लिए नल से सीधे अशुद्ध पानी लेकर इस्तेमाल किया जा रहा था। कूड़ेदान ढके नहीं हुए थे और उनकी नियमित अंतराल पर सफाई नहीं हो रही थी। खाने की चीजों को मक्खी, कीड़ों और धूल से बचाने के लिए उन्हें ढककर नहीं रखा जा रहा था। इसके अलावा, ट्रेनों में चूहे, कॉकरोच  का आना जाना आम बात है। जो खाने को प्रदूषित करते हैं।


CAG रिपोर्ट के मुताबिक,भारतीय रेल प्रशासन जरूरी बेस किचन, ऑटोमैटिक वेंडिंग मशीनें जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावशाली कदम उठाने में नाकाम रहा। रिपोर्ट में लिखा है, 'सात रेलवे जोन्स में कैटरिंग सर्विस के लिए प्रावधानों का ब्लूप्रिंट ही नहीं तैयार किया गया। इसके अलावा,यह भी लिखा है कि पॉलिसी में बार-बार बदलाव करने से यात्रियों को कैटरिंग सर्विस मुहैया कराने वाले मैनेजमेंट पर बेतरतीब रहने का संकट छाया रहता है।