OMG! मंगल ग्रह की मिट्टी में पैदा हुआ 'टमाटर', और जानिए क्या-क्या?

नई दिल्ली (30 जून): एक तरफ देश में टमाटर के भाव सातवें आसमान पर हैं। कोई इसके लिए कम उत्पादन को कारण बता रहा है, तो कोई कुछ और। वहीं एक ऐसी खबर आई है जो भरोसा देती है कि अब 'सात आसमान' पार कर मंगल ग्रह की मिट्टी पर टमाटर पैदा किया जाएगा। 

जी हां, आपको भले हैरानी हो लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसा कर दिखाया गया है। मंगल पर कॉलोनी बसाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ने में सफलता मिली है। वैज्ञानिकों ने पहली बार मंगल ग्रह की मिट्टी पर खाने योग्य फसल पैदा कर इसे साबित कर दिया है।

ब्रिटिश अखबार 'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के मुताबिक, नीदरलैंड में रिसर्चर्स लाल ग्रह और चंद्रमा की मिट्टी पर फसल उगाकर ऐसी परिस्थितियां तैयार करने की कोशिश में लगे हैं। Wageningen यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च सेंटर, Wageningen के वैज्ञानिक इस बात को लेकर चिंतित थे, कि अगर फसल पैदा की जाती है, तो कहीं इसमें ऐसे खतरनाक तत्व ना हों, जो इंसान के लिए जहरीले हो सकते हैं।

लेकिन प्रयोग में टमाटर, मटर, मूली और राई पैदा कर यह साबित कर दिया गया है, कि फसल केवल सुरक्षित ही नहीं है, बल्कि पृथ्वी की मिट्टी पर पैदा फसलों से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक हैं।

डॉ. वीगर वेमलिंक ने बताया, "मूली, मटर, राई और टमाटर के लिए हमने प्राथमिक विश्लेषण किया और नतीजे काफी आशाजनक हैं। हम उन्हें खा सकते हैं।"

नासा पहले कह चुका है कि यह 2030 तक मार्स कॉलोनी बसाना चाहता है। जबकि, यूरोपियन स्पेस एजेंसी चंद्रमा पर जल्दी लौटना चाहती है। लेकिन अगर योजनाओं को साकार किया गया, तो अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को अपना खाना पैदा करना सीखना होगा।

रिसर्च में पाया गया कि केवल मूली में एल्यूमिनियम, आयरन और निकिल की ऊंची मात्रा पाई गई। उन्होंने चंद्रमा की मिट्टी में भी इन्हें पैदा किया लेकिन उनकी गुणवत्ता तुलना में अच्छी नहीं रही। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि ये समस्या बाहर से ज्यादा है। मिट्टी को धोने के बाद इनके स्तर को नीचे लाया जा सकेगा और खाने के लिए सुरक्षित किया जा सकेगा।

रिसर्चर्स ने पाया कि निष्कर्ष बेहद खास थे। उन्होंने पाया कि पृथ्वी की मिट्टी के गमलों में लेड, आर्सेनिक और कॉपर की मात्रा मंगल की तुलना में ज्यादा थी। फिलहाल, अभी यह नहीं पता लगा है कि हैवी मैटल्स की मात्रा पृथ्वी में उसी समान है जैसे ये कमतर गुरुत्वाकर्षण की अवस्था में मंगल और चंद्रमा पर हो सकती है! स्थल पर रिसर्च से ही इसका जवाब मिल सकता है।

रिसर्चर्स अब ग्रीन बीन्स, पालक और आलू पर टेस्ट करने की योजना बना रहे हैं। वे आगे इसके लिए फसलों में विटमिन्स, फ्लवोनॉइड्स और एल्केलॉइड्स पर टेस्ट करेंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए क्राउडफंडिंग भी की जा रही है।