बंगाल : वफ़ादारी के वादे के लिए कांग्रेस अपने विधायकों से ले रही है शपथपत्र

कोलकाता (25 मई) :  पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी राज्य में पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों से एक शपथपत्र पर हस्ताक्षर करा रहे हैं। 100 रुपए के स्टैम्प पेपर पर इस शपथपत्र में विधायकों से ये वादा लिया जा रहा है कि वे किसी भी तरह की पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेंगे और ना ही वे दलबदल कर तृणमूल कांग्रेस में जाएंगे।

बता दें कि कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट ने पश्चिम बंगाल में मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन 44 सीटों के साथ कांग्रेस राज्य में तृणमूल के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। वहां सीपीएम अब तीसरे नंबर की पार्टी हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव से कांग्रेस की इस बार 3 सीट ही बढ़ी हैं लेकिन उसका वोट शेयर 9.6 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गया है। इस तरह कहा जा सकता है कि 15 साल बाद कांग्रेस बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने सभी विधायकों से शपथपत्र लेने का फैसला किया। इससे समझा जा रहा है कि कांग्रेस के सामने अपने विधायको को एकजुट रखना भी चुनौती है।  

बता दें कि कांग्रेस 1977 से पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर है। 1977 में इमरजेंसी के सूत्रधार माने जाने वाले सिद्दार्थ शंकर रे की हार के साथ ही कांग्रेस की ताकत राज्य में लगातार कम होती गई। 2011 में कांग्रेस के लिए हालत और विकट हो गई जब इस पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।

अब देखना है कि अधीर रंजन चौधरी की ओर से खेला गया शपथपत्र का दांव पार्टी के लिए कितना कारगर रहता है।