'कार्रवाई से बचने के लिए सऊदी अरब ने ट्रंप को दी रिश्वत'

नई दिल्ली (13 फरवरी): एक टीवी चैनल ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने खुद को बड़ी मुश्किल से बचाने के लिए अमरीकी कंपनी के माध्यम से डोनाल्ड ट्रंप को रिश्वत दी है।

अलआलम टीवी चैनेल की रिपोर्ट के अनुसार आतंकवादियों के समर्थकों के विरुद्ध न्याय नामक क़ानून से स्वयं को बचाने के लिए सऊदी अरब की ओर से एक अमरीकी कंपनी के माध्यम से डोनाल्ड ट्रंप तक रिश्वत पहुंचवाई है। चैनल ने दावा किया है कि एमएसएल ग्रुप माध्यम से सऊदी अरब ने ट्रम्प को रिश्वत दी।

इस कंपनी ने यह प्रयास किया कि अमरीका के सेवानिवृत्त सैनिकों और कार्यकर्ताओं को इस प्रकार से तैयार किया जाए कि वे अमरीकी कांग्रेस को इस बात के लिए राज़ी कर लें कि "जास्टा" या आतंकवादियों के समर्थकों के विरुद्ध न्याय नामक क़ानून को समाप्त किया जाए।  यदि ऐसा हो जाता है तो ग्यारह सितंबर घटना के प्रभावित, सऊदी अरब के विरुद्ध शिकायत नहीं कर पाएंगे।

सऊदी अरब ने ट्रंप को भारी रिश्वत देने के अतिरिक्त अमरीका के रिटायर्ड सैनिकों को भी हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराईं।  अमरीका के यह सेवानिवृत्त सैनिक,  Mslgroup नामक कंपनी के माध्यम से दिसंबर में पेंसिलवेनिया राज्य में ट्रम्प के होटल में ठहरे थे।

इससे पहले अमरीकी समाचारपत्र हील ने लिखा था कि नवंबर के आरंभ तक सऊदी अरब ने 14 कंपनियों को भारी रक़म दी थी ताकि वे कांग्रेस को "जास्टा" क़ानून निरस्त करने के लिए तैयार करे।  हालांकि अमरीकी क़ानून के अनुसार इस देश के अधिकारी किसी भी स्थिति में बाहर की सरकारों से रिश्वत नहीं ले सकते।

"जास्टा" क़ानून के समर्थकों का मानना है कि यह क़ानून, अमरीका में बाहर की सरकारों द्वारा समर्थित आतंकवाद को रोकने में प्रभावी सिद्ध हो सकता है और साथ ही 11 सितंबर 2001 की घटना के प्रभावितों को हर्जाना दिलवा सकता है।  "जास्टा" या आतंकवादियों के समर्थकों के विरुद्ध न्याय नामक क़ानून अमरीकी नागरिकों को यह अधिकार देता है कि देश में विदेशी सरकारों के समर्थन से होने वाली आतंकवादी घटना के प्रभावित हर्जाने की मांग कर सकते हैं।