उत्तराखंड में पहली बार 12 हजार फुट पर दिखा बाघ

नई दिल्ली(30 जुलाई): वन अधिकारियों को 12,000 फुट की ऊंचाई पर एक बाघ के होने के सबूत मिले हैं। इस खबर से वन्यजीव विशेषज्ञ काफी रोमांचित हैं। कैमरा की तस्वीरों में इस बाघ को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित असकोट के ऊपरी इलाकों में टहलते हुए देखा गया है।

- इतनी ऊंचाई पर स्थित इलाकों में बाघ नहीं पाए जाते हैं। आमतौर पर बर्फ में रहने वाले तेंदुए ही इस ऊंचाई पर रहते हैं। जंगल में लगे कैमरा ने इस बाघ की तस्वीर कैद की है।

- देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिक बिलाल हबीब ने बताया कि भारत में इतनी ऊंचाई पर किसी बाघ के होने की यह पहली जानकारी है। उन्होंने बताया, 'ब्रिटेन के साहित्य से जुड़े कुछ पुराने कागजात हैं जिनमें इतनी ऊंचाई पर बाघ देखे जाने का जिक्र है, लेकिन जितना मैं जानता हूं उसके मुताबिक इसका ना तो कोई वैज्ञानिक साक्ष्य है और ना ही सबूत के तौर पर कोई तस्वीर ही है।'

- अबतक सबसे ऊंचाई पर बाघ के मौजूद होने की बात भूटान में देखी गई थी। वहां 13,000 फुट की ऊंचाई पर एक बाघ को देखा गया था। प्रमुख वन्यजीव संरक्षक डी.वी.एस खाटी ने बताया, 'उत्तराखंड में 3,000 से 4,000 फुट की ऊंचाई पर बाघ देखे जाते हैं, लेकिन 12 हजार फुट के ऊपर बाघ की मौजूदगी हमारे लिए भी एक खोज है।' माना जा रहा है कि यह बाघ हल्द्वानी और चंपावत के जंगलों से काली नदी होते हुए यहां आया है।

- खाटी ने आगे बताया, 'हमने यह जानकारी तत्काल सार्वजनिक नहीं की। पिथौरागढ़ के बहुत सारे हरे-भरे इलाके संरक्षित क्षेत्र से बाहर हैं। यह इलाका नेपाल सीमा के पास स्थित है। वहां शिकारियों की गतिविधि अक्सर देखी जाती है। ऐसे में हम बाघ की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते।' उन्होंने बताया कि वन्यजीव विभाग नेपाल के वन्यजीव विभाग और राज्य पुलिस के साथ संपर्क कर रहा है। इस मामले में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस और सीमा सुरक्षा बल की भी मदद ली जा रही है।