टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने बीबीसी पर लगाया 5 साल का बैन

नई दिल्ली(28 फरवरी): राष्‍ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण(एनटीसीए) ने बीबीसी और पत्रकार जस्टिन रॉलेट पर देश के सभी टाइगर रिजर्व में घुसने पर पांच साल का बैन लगा दिया है।

- यह कदम असम के काजिरंगा नेशनल पार्क में शिकारियों के खिलाफ कड़ी नीति अपनाने पर सवाल उठाने वाली बीबीसी की डॉक्‍यूमेंटरी के सामने आने के बाद उठाया गया है।

-  एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, बैन बीबीसी के पूरे नेटवर्क पर लगाया गया है। बता दें कि बीबीसी के दक्षिण एशिया के संवाददाता रॉलेट ने काजिरंगा अभ्‍यारण में गैंडों को पर ‘वन वर्ल्‍ड: किलिंग फॉर कंजर्वेशन’ नाम से डॉक्‍यूमेंटरी बनाई थी। इसमें गैंडों को बचाने के लिए अपनाए जा रहे कदमों पर सवाल उठाए गए थे।

- इसमें दावा किया गया था कि काजिरंगा के फॉरेस्‍ट गार्ड को यह अधिकार दिया गया है कि अगर उन्‍हें लगे गैंडों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है कि तो वे किसी को भी गोली मार सकते हैं। जस्टिन रॉलेट ने अपनी डॉक्‍यूमेंटरी में बताया था कि फॉरेस्‍ट गार्ड को मिले इस तरह के अधिकारों के चलते गैंडों से ज्‍यादा इंसान मारे गए। पिछले साल 17 गैंडों की तुलना में 23 लोग मारे गए। फिल्‍म के परिचय वाले बीबीसी के आर्टिकल में रॉलेट ने बताया कि साल 2014 के बाद से केवल दो शिकायत को सजा हुई जबकि 50 को गोली मार दी गई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय पर ने डॉक्‍यूमेंटरी की तीखी आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह से गलत बताया था।

- काजिरंगा टाइगर रिजर्व के निदेश सत्‍येंद्र सिंह ने इंडियन एक्‍सप्रेस को बताया था कि देखते ही गोली मारने जैसी कोई नीति नहीं है। गरीब फॉरेन गार्ड जो कि काफी कठिन काम करते हैं उन्‍हें बचाने के लिए कानूनी उपाय है। बीबीसी ने तथ्‍यों को गलत तरह से पेश किया और पुरानी फुटेज व इंटरव्यू को नाटकीय रूप से दिखाया। एनटीसीए की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया था कि बीबीसी और जस्टिन रॉलेट ने पर्यावरण मंत्रालय को दिखाए बिना डॉक्‍यूमेंटरी का प्रसारण कर दिया। उन्‍हें सात दिन का कारण बताओ नोटिस दिया गया था।

- खबर के अनुसार, एनटीसीए की ओर से सोमवार(27 फरवरी) को मेमोरेंडम जारी किया गया। इसमें कहा गया कि बीबीसी आवश्‍यक प्रीव्‍यू के लिए विदेश और पर्यावरण मंत्रालय को डॉक्‍यूमेंटरी स‍बमिट करने में नाकाम रही। आदेश में सभी टाइगर रेंज वाले राज्‍यों के चीफ वाइल्‍डलाइफ वार्डन्‍स और टाइगर रिजर्व के फील्‍ड डायरेक्‍टर्स से कहा गया है कि वे बीबीसी को पांच साल तक फिल्‍म बनाने की अनुमति ना दें।