इस जवान से मिलकर भावुक हुए दलाई लामा, जानें, क्यों

धर्मशाला(2 अप्रैल): तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा असम राइफल्स के रिटायर्ड जवान से मिलकर भावुक हो गए। ये वही जवान है जिसने 1959 में दलाई लामा के भारत आने के दौरान सुरक्षा प्रदान की थी। 

- तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद दलाई लामा अपने समर्थकों के साथ मार्च, 1959 में 5 असम राइफल्स के सात जवानों की मदद से भारत आए थे। इनमें नरेन चंद्र दास भी शामिल थे। 

- इसके बाद दलाई लामा को नरेन चंद्र ने सुरक्षित भारत पहुंचाया था जो उस वक्त 23 साल के थे। पिछले 60 वर्षों में वह दोनों केवल पिछले साल अप्रैल में गुवाहाटी में मिले थे। दलाई लामा ने तब खुद को शरण देने के लिए भारत और यहां के नागरिकों का धन्यवाद किया था। तब उन्होंने नरेन चंद्र को मैक्लॉडगंज में आमंत्रित किया था।

- स्वास्थ्य खराब होने पर भी नरेन दास ने आमंत्रण स्वीकार किया और दलाई लामा से मिलने चले आए। 

- तिब्बत की निर्वासित सरकार के कार्यक्रम में पूरी कैबिनेट मौजूद रही जिसमें खुद तिब्बती प्रधानमंत्री लोबसांग सांगेय दलाई लामा को कार्यक्रम में लेकर आए।

- रविवार को सुगलगखांग मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दलाई लामा सबसे पहले नरेन चंद्र दास के पास गए और उनका स्वागत किया। खास बात यह रही कि जब दलाई लामा अपने मेहमानों का सम्मान कर रहे थे तब केवल नरेन दास ही ऐसे थे जिन्हें उन्होंने गले से लगाकर सम्मान दिया।