INSIDE STORY: फिर कांपी धरती- हफ्तेभर में लगे 5 झटके, जानिए- कितनी सुरक्षित है दिल्ली...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (27 अगस्त):  हिमाचल प्रदेश में शनिवार को भूकंप के दो झटके महसूस किए गए। 2 घंटे के अंदर लगे 3 झटके। भूकंप का पहला झटका सुबह 6 बजकर 44 मिनट और दूसरा 7 बजकर 5 मिनट जबकि तीसरा सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर महसूस किया गया। रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता 4.6 मापी गई। भूकंप का केंद्र कुल्लू जिला में था। भूकंप के झटके लगते ही लोग घबराए घरों से बाहर भागे। हालांकि जान-माल के किसी नुकसान की तत्काल कोई खबरें नहीं हैं। गौरतलब है उत्तराखंड और हिमाचल के हिमालय क्षेत्र को दुनिया भर में भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। हिमाचल भूकंप की दृष्टि से जोन-4 में आता है।

24 अगस्त को म्यांमार में आया था भूकंप, जिसका झटका भारत में भी लगा था...

- भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में 24 अगस्त शाम 4 बजकर 4 मिनट पर तेज भूकंप आया।  - म्यांमार में रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.8 थी।  - भूकंप का केंद्र म्यांमार से 190 km दूर साउथ-वेस्ट में जमीन से 84km नीचे था।  - भूकंप के झटके उत्तर-पूर्व समेत बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड तक महसूस किए गए थे।

24 अगस्त को दिल्ली में लगा था भूकंप का झटका... 

- दिल्ली में 22 अगस्त को दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।  - दिल्ली के अलावा हरियाणा और राजस्थान में भी झटके महसूस किए थे।  - रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.5 थी।  - हरियाणा का महेंद्रगढ़ भूकंप का केंद्र बताया गया था।

भूकंप के लिहाज से भारत को चार Zone में बांटा गया है...

- भू-वैज्ञानिकों ने भूकंप के खतरे को देखते हुए देश के हिस्सों को सीस्मिक जोन में बांटा है। - भूकंप की दृष्टि से देश को 4 जोन में बांटा गया है। - जोन 2, जोन 3, जोन 4 और जोन 5, सबसे अधिक खतरनाक जोन-5 है। - सबसे कम खतरा जोन 2 में है और सबसे ज्यादा जोन 5 में है।

'खतरनाक' श्रेणी में है दिल्ली... - दिल्ली जोन 4 में है, यहां रिक्टर पैमाने पर 6 से ज्यादा तीव्रता वाला भूकंप भारी तबाही मचा सकता है। - अभी तक के रेकॉर्ड के मुताबिक राजधानी में 5.5 रिक्टर स्केल वाले कई भूकंप आ चुके हैं।  - दिल्ली के 70 फीसदी कंस्ट्रक्शन खतरनाक बताए जाते हैं।  - पर्यावरणविद मानते हैं कि एफएआर (फ्लोर एरिया रेशो) देकर सरकारी एजेंसियां खतरे को और बढ़ा रही हैं।  - सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली में 70-80 फीसदी भवनों में नियमन का उल्लंघन हुआ है। - जियोलॉजिस्ट मानते हैं कि दिल्ली में ग्राउंड वॉटर लेवल कम होता जा रहा है और इससे भी खतरा बढ़ता जा रहा है। - राजधानी में करीब 16 सौ अनधिकृत कॉलोनियां हैं जबकि पुनर्वास कॉलोनियों की संख्या भी करीब चार दर्जन है। - जेजे कलस्टर तो सैंकड़ों की तादाद में हैं। ऐसी कॉलोनियों में मकानों के निर्माण में भूकंप रोधी तकनीक का कतई इस्तेमाल नहीं हुआ है।

दिल्ली में भूकंप के खतरे दो किस्म के हैं... - एक तो यमुना किनारे बने मकानों का मामला है जबकि दूसरा मामला शहर के अन्य हिस्सों का है। - नदी किनारे की जमीन रेतीली है और ऐसे स्थान पर बने मकान बड़े जलजले में सीधे जमीन के अंदर चले जाते हैं - जबकि ठोस मिट्टी वाले इलाकों में इमारतों के गिरने की स्थिति बनती है।

चारों ओर फॉल्टलाइन से घिरी है दिल्ली... देश की राजधानी दिल्ली चारों ओर फॉल्ट लाइन से जुड़ी है, इनमें से किसी भी फॉल्ट लाइन पर होने वाली कोई बड़ी हलचल दिल्ली को तबाह कर सकती है। - इनमें सबसे लंबी फॉल्ट लाइन दिल्ली सरगोदा है, जो पाकिस्तान तक जाती है। - दूसरी फॉल्ट लाइन दिल्ली-देहरादून है जो इसे हिमालय से जोड़ती है। - तीसरी फॉल्ट लाइन रोहतक-फरीदाबाद। - चौथी दिल्ली- आगरा फाल्ट लाइन है।

इसके अलावा छोटी फॉल्ट लाइन भी हैं जिसमें  - सोना फाल्ट लाइन,  - दिल्ली-हरिद्वार रिज जोन,  - महेंद्रगढ़ फाल्ट लाइन,  - मुरादाबाद फाल्ट लाइन  - राजस्थान बाउंड्री फाल्ट लाइन शामिल हैं।

क्यों खतरनाक हैं ये फाल्ट लाइने... - इन फाल्ट लाइनों में पिछले कुछ वर्षो में लगातार हुए कंपन की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 1-4 मापी गई है, यानी की यहां पर भूगर्भीय गतिविधि हो रही हैं। - दिल्ली-सरगोधा रिज में भी भूकंप की प्रबल आशंकाएं रहती है, क्योंकि सन् 1720 में इस रिज मे 6.7 क्षमता का भूकंप आया था। - जिसके कारण दिल्ली और उसके समीपवर्ती इलाकों मे भारी तबाही हुई थी, पिछले लगभग 300 सालो में यह रिज शांत है। - इसके अलावा दिल्ली-देहरादून फाल्ट में 6.5 से 6.7 तक की तीव्रता के भूकंप पैदा करने की क्षमता है। - दिल्ली-देहरादून फाल्ट इसे हिमालय से जोड़ता है, इसलिए हिमालय क्षेत्र में होने वाली हलचल का सीधा असर राजधानी पर पड़ता है।

भूकंप के वक्त क्या करें... - भूकंप के समय बिना घबराए नहीं सुरक्षित स्थान तक पहुंचें, हड़बड़ाहट घातक साबित होती है।  - घर के अंदर हैं तो ऊपर से गिर सकने वाले भारी सामान से दूरी बनाए रखें।  - कमरे के किसी भी कोने में या दरवाजे की चौखट के नीचे शरण लें। - झटके बंद होते ही खुले व सुरक्षित स्थान की तरफ जाएं।  - घर के बाहर हैं, तो इमारतों, पेड़ों, खंभों व बिजली की तारों से दूर खुले स्थान में जाएं।  - वाहन में हों तो वाहन रोक लें और अंदर ही रहें।

क्या करें तैयारी... - भूकंप अवरोधी तकनीक के मकान बनाएं, इससे खर्च नाममात्र ही बढ़ेगा, लेकिन भूकंप से सुरक्षा बहुत अधिक मिलेगी।  - घर में एक सुनिश्चित स्थान पर हर समय फर्स्ट एड किट, टार्च, रेडियो व कई दिन तक खाया जा सकने वाला खाना रखें, यह आपदा में काम आएगा।  - भूकंप के समय बाहरी मदद पहुंचने में देर लग सकती है, इसलिए सांसें चलती रखने के लिए हड़बड़ाहट न करें, इससे एनर्जी खत्म होगी।