लखनऊ :वेंटिलेटर न मिलने से मर गईं तीन नवजात

लखनऊ(12 अगस्त): क्वीनमैरी अस्पताल की अव्यवस्था ने तीन नवजात बच्चियों की जान ले ली। तीमारदारों का आरोप है कि जन्म के बाद बच्चियों को सांस लेने में दिक्कत थी, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद डॉक्टरों ने वेंटिलेटर और एम्बुबैग फुल होने की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए।

- अलीगंज निवासी उदय ने बताया कि उनकी पत्नी सीमा को बुधवार रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर घरवाले सीमा को सबसे पहले अलीगंज के बीएमसी में ले गए। वहां डॉक्टर ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए प्रसव कराने से मना कर दिया। इसके बाद घरवाले उन्हें क्वीनमेरी अस्पताल ले गए। वहां रात एक बजे सीमा ने जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया।

- सीमा ने बताया कि एक बच्ची को जन्म के बाद ही सांस लेने में परेशानी होने लगी। डॉक्टर को बुलाया तो उन्होंने वेंटिलेटर और एम्बुबैग फुल होने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ लिया। नतीजा-कुछ देर तड़पने के बाद बच्ची ने दम तोड़ दिया। इसी बीच दूसरी बच्ची को भी सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गई। डॉक्टर से कई बार मिन्नत करने पर उसे एम्बुबैग लगाया गया, लेकिन वेंटिलेटर नहीं मिला। गुरुवार सुबह नौ बजे उसकी भी मौत हो गई।

- क्वीन मैरी की एचओडी विनीता दास ने बताया कि अस्पताल को अलग से कोई भी सालाना बजट नहीं मिलता है। जरूरत पड़ने पर प्रस्ताव बनाकर केजीएमयू को भेजा जाता है। वहां से ही बजट मिलता है।

1200 से ज्यादा बेड, एक भी वेंटिलेटर नहीं

राजधानी में नौ सीएचसी, आठ बीएमसी के अलावा झलकारी बाई, डफरिन, लोहिया और क्वीनमेरी में प्रसव कराया जाता है। इन सभी अस्पतालों में 1200 से अधिक बेड हैं। रोज करीब डेढ़ से अधिक प्रसव कराए जाते हैं और यहां जन्म लेने वाले 10-15 बच्चों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। लेकिन इनमें से किसी में भी एक भी वेंटिलेटर नहीं है। स्थिति गंभीर होने पर मरीजों को केजीएमयू रेफर किया जाता है। वहां भी सिर्फ 18 वेंटिलेटर हैं जो हर समय फुल रहते हैं। एंबुबैग्स के मामले में भी हालात अच्छे नहीं। सीएचसी और बीएमसी के पास तो एक भी एंबुबैग नहीं है, जबकि बाकी अस्पतालों में भी कुल मिलाकर सिर्फ 28 एंबुबैग हैं।