मेला: 'लैला-मजनू' की मज़ार पर भारी तादाद में पहुंचे प्रेमी जोड़े

कुलदीप गोयल, श्रीवत्सन, बिन्जौर (15 जून): राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की अनूपगढ तहसील में भारत-पाकिस्तान के बॉर्डर से सिर्फ 3 किलोमीटर पहले लैला मजनू की मजार पर मेला लगा हुआ है। सीमा पर बसे बिन्जौर गांव में दूर-दूर से प्रेम के पंछी इकट्ठे हुए हैं। प्यार की दर पर क्या हिंदू और क्या मुसलमान सबको भरोसा है कि पीर बन चुके लैला और मजनू उन्हें जरूर मिलवा देंगे। बहुत से जोड़े इस भरोसे पर मुहर भी लगा रहे हैं, बहुतों की मन्नत पूरी हुई है और हाथों में हाथ लेकर वो चादर चढ़ाने आए हैं। लैला मजनू के इश्क को इबादत कहने वालों की दुनिया में कोई कमी नहीं है। प्यार पर यकीन करने वालों के लिए तो यह जगह तीर्थ बन गई है। अपनी हस्ती मिटाकर अमिट प्रेम के प्रतीक बन गए लैला-मजनू की इस मजार पर हर साल जून के महीने में मेला लगता है। पहले ये मेला एक दिन का होता था। देश-विदेश से प्रेमी पहुंचने लगे तो प्यार का ये मेला पांच दिन का हो गया। इन पांच दिनों में कितने ही जोड़ों को सलामती की दुआ मिलती है। जून के महीने में रेगिस्तान के तपती रेत भी उन प्रेमियों को रोक नहीं पा रही, जो इश्क में आग का दरिया पार करने का जज्बा रखते हैं। यहां आने वाला हर शख्स या तो अपनी पसंद की लड़की या लड़के से शादी की मन्नत मांगने आया है या मन्नत पूरी होने पर बंधा धागा खोलने। अब इस मेले में कुश्ती-कबड्डी भी है और दंगल भी, राग-रागिनी से लेकर आर्केस्ट्रा तक लैला-मजनूं की मजार पर पहंचे प्रेमियों का मनोरंजन कर रहे हैं। कुछ साल पहले तक यहां कच्ची मजार थी। यहां सिर्फ सीमा की सुरक्षा करते जवान ही होते थे, लेकिन अब यहां हजारों लोग पहुंच रहे हैं। यहां सेना सिर्फ सरहद ही नहीं सम्हालती बल्कि प्रेमियों का ख्‍याल भी रखती है। तपती गर्मी में पीने के पानी का इंतजाम सेना ही कर रही है, लेकिन मोहब्बत की मजार पर पहुंचे लोगों को सरकार से शिकायत भी है।