प्याज के आए 'बुरे' दिन, सरकारी गोदामों में रखने की जगह नहीं, सड़ने लगा हजारों टन

मनीष पुरोहित, गोविंद सिंह, नई दिल्ली (22 जून): प्याज के वो दिन भी थे कि कीमतें सुन सुनके कलेजा मुंह को आ जाता था। ज्यादा दिन नहीं हुए जब प्याज के दाम ने पूरे देश की सियासत को सरगर्म कर दिया था। आज उस प्याज को कोई पूछने वाला नहीं है। आप तो आज भी प्याज कम से कम बीस से पच्चीस रुपए किलो खरीद रहे होंगे। जबकी असलियत ये है कि प्याज की कोई कीमत है ही नहीं। ये अनमोल नहीं बेमोल है। प्याज की पेंचोखम वाली ये कहानी आपको परेशान कर सकती है। 

महंगी दाल और टमाटर के दौर में प्याज की कोई खबर ही नहीं ले रहा। कल तक अपनी कीमतों से आपकी आंखों में आंसू लाने वाला प्याज अपने सबसे बुरे दौर में है। छह आठ महीने पहले जिस प्याज को अलमारियों, संदूकों दराजों में खजाने की तरह रखा जा रहा था। आज उसे देखने वाला तक कोई नहीं है। खुले आसमान के नीचे हजारों टन प्याज बर्बाद हो रहा है। हाय रे प्याज वक्त इतनी तेजी से बदलता है तुम्हारी हालत ने बता दिया।

मतलब प्याज की कहानी में इमोशन है, ड्रामा है, रोमांच है, रोमांस है, एक्शन है, रिएक्शन है। इस कहानी को अच्छे से समझ लीजिए। इस दर्शन का दृष्टांत बन गया है प्याज कि वक्त एक सा नहीं रहता। प्याज की फितरत है रुलाना। ये कब किसको रुला दे कह नहीं सकते।

तो प्याज के दुर्दिन की खबर ये है कि छह आठ महीने पहले सोने के भाव बिकने वाले प्याज ने किसानों के आंखों में बड़े-बड़े सपने भर दिए। कर्ज ले लेकर भरपूर फसल उगाई। रिकॉर्डतोड़ उत्पादन हुआ। नतीजा भाव आसमान से जमीन पर आ गिरे। आढ़तिए पचास पैसे किलो तक प्याज खऱीदने को तैय़ार नहीं। किसान की किस्मत ने फिर दगा दे दिया था। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की दुर्दशा देखते हुए 6 रुपए किलो की दर पर प्याज की खरीद शुरु की। बेहाल किसानों ने सरकारी गोदामों में इतने ट्रक प्याज उड़ेल दिए कि रखने की जगह नहीं रही । लाखों टन प्याज खरीदा गया और हजारों टन बर्बाद हो रहा है।

6 रुपए किलो की सरकारी खरीद से भी किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है बस घाटा कम हो गया है। सोचिए कि प्याज की कहानी में कितने पेंच है कि आपको अभी भी ये 20 से 25 रुपए किलो मिल रहा होगा। जबकि हजारों टन प्याज सरकारी गोदामों में सड़ रहा है, बर्बाद हो रहा है।।

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से 7 लाख टन प्याज की खरीद की है। सिर्फ मंदसौर में 4334 क्विंटल प्याज की खरीद हुई है। हालत ये हो गई कि सरकारी गोदामों प्याज रखने की जगह तक नहीं रही है। और जब जगह नहीं तो हजारों टन प्याज गोदामों में सड़ने लगा। भाषण सुन लीजिएगा तो लगेगा कि भारत की वैज्ञानिक तरक्की रॉकेट पर सवार है। लेकिन प्याज़ नहीं संभाल सकते हम। अच्छा गोदाम नहीं बना सकते। अब देखिए कि एमपी सरकार ने कहा था 30 जून तक लगातार प्याज की खरीद होगी। बाजार के मारे किसान ऐसे उमड़े कि बुधवार से ही खरीद बंद हो गई।

वक्त-वक्त की बात है। वर्ना छह महीने पहले यही प्याज सरकार से जनता तक को रुला रहा था। आज प्याज के गर्दिश के दिन हैं और किसान के भी। कमाई के चक्कर में कर्जदार हो गए किसान कोसें भी तो किसको।