'भारत माता की जय' नहीं कहने वालों को देश में रहने का हक नहीं- देवेंद्र फड़नवीस

मुंबई (3 अप्रैल): महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि जो लोग भारत माता की जय का नारा नहीं लगाते उन्हें देश में रहने का हक नहीं है। नासिक में एक कार्यक्रम के दौरान देवेंद्र फड़नवीस ने ये बयान दिया। सीएम फड़नवीस ने कहा देश में रहना है तो भारत माता की जय कहिए। भारत माता की जय कहना ही होगा।

'भारत माता की जय कहना होगा', 'जय नहीं बोलने वालों को देश में रहने का हक नहीं', 'जो लोग भारत माता की जय नहीं बोल सकते, वो देश में नहीं रह सकते' ऐसे बयान पूरा देश बीते करीब एक महीने से सुन रहा है। कुछ बयान भारत माता की जय कहने को मजबूर करने वाले हैं। तो कुछ बयान भारत माता की जय कहने वालों पर सवाल उठाने वाले हैं। कुल मिलाकर लब्बोलुआब ये है कि भारत में भारत माता की जय पर विवाद चल रहा है और आने वाले वक्त में भी इस विवाद के खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। 

इस विवाद का आगाज आरएएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान से हुआ था। जिसमें उन्होनें कहा था कि लोगों को भारत माता की जय कहना सिखाना होगा। बयान पर विवाद होना तय था और हुआ भी, इसके बाद डेमेज कंट्रोल के नाम पर मोहन भागवत ने कहा कि जबरदस्ती लोगों से भारत माता की जय ना बुलवाई जाए।

पूरे विवाद का दूसरा पहलू ये भी है कि भारत माता की जय का मसला कहीं ना कहीं राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रवाद से भी जुड़ा दिखा, जो वो था भी। बहरहाल सियासी हलकों में इस मसले पर कोई जय बोलने के पूरी तरह खिलाफ था, तो कोई बार-बार जय बोलने को अपना हक बताता रहा।

बयानबाजी के साथ-साथ इस विवाद में सड़क से लेकर सदन में भी गहमा-गहमा देखने को मिली। MIM विधायक वारिस पठान को 'जय' नहीं बोलने पर निलंबित कर दिया गया। दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी कर कहा कि मुसलमान भारत माता की जय नहीं बोल सकते हैं। एमपी विधानसभा में ओवैसी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।

बहरहाल विवाद जारी है और सवाल कई है। मसलन जबरदस्ती भारत माता की जय क्यों बुलवाई जाए। क्या भारत माता की जय बोलना ही राष्ट्रभक्ति का सबूत है। वहीं दूसरा पहलू ये है कि क्यों नागरिकों का एक समूह देश की जयकार करने में हिचक रहा है। क्यों देश की जयकार बोलने पर एतराज है।