आजादी की दहलीज पर खड़े भारत के वो आखिरी 3 दिन...

नई दिल्ली (13 अगस्त): 12 अगस्त 1947 के दिन लार्ड माउंटबेटन सीमा आयोग की एक खास रिपोर्ट के आने का इंतजार कर रहे थे। रिपोर्ट में देरी के कारण दो बार बैठक स्थगित करनी पड़ी और शाम को बैठक शुरू हुई तो मुद्दा यही था कि अगर रिपोर्ट नहीं आई तो क्या किया जाएगा।

अंत में चटगांव पहाडिय़ों व पंजाब के मुद्दों पर बहस उठी। माउंटबेटन ने दो अधिकारियों को रेडक्लिफ के पास सीमा आयोग की रिपोर्ट को लाने के लिए भेजा, जहां रेडक्लिफ कहते हैं कि पंजाब और बंगाल सीमा आयोग की रिपोर्ट तैयार है। लेकिन सिलहट में वक्त लगेगा। इधर, मद्रास व उदयपुर भारत में विलय की घोषणा कर देते हैं।

कश्मीर का भारत में विलय... वहीं कश्मीर के राजा ने दोनों देशों भारत और पाकिस्तान के साथ रहने का समझौता किया था। राजा को पता था कि यह दोनों देशों के बीच एक बड़ा मुद्दा है। अंतत: पाक की इच्छा के खिलाफ कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया। दिल्ली में डॉन अखबार के दफ्तर में हिंदू अतिवादियों ने आग लगा दी। इसके साथ ही डॉन के संपादक अल्ताफ हुसैन के घर को भी जला दिया गया।