ऐसे ईस्ट इंडिया कंपनी मिली थी भारत में एंट्री...

नई दिल्ली (14 अगस्त): हिंदुस्तान से जब ईस्ट इंडिया कंपनी को निराशा हाथ लगी तो उसने थॉमस रो को भारत भेजा। थॉमस रो ब्रिटेन के किंग जेम्स प्रथम का राजदूत था, वो ईस्ट इंडिया कंपनी के हितों की रक्षा और भारत में व्यापार के लिए मौके की तलाश में आया था। तब ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी ने पैर रखे। जो निशान ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत की ज़मीन पर छोड़े वो आज तक मिटे नहीं हैं।

साल 1612:

- अपनी दमनकारी नीतियों के लिए मशहूर अंग्रेज़ों ने एक बड़े पुर्तगाली बेड़े को डुबो दिया। - अंग्रेज़ों की ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूरत में व्यापार शुरू कर दिया। - 1613  में कम्पनी को एक शाही फ़रमान मिला और सूरत में व्यापार करने का उसका अधिकार सुरक्षित हो गया। - लेकिन अब भी अंग्रेज़ों के लिए भारत में खुलकर व्यापार करना आसान नहीं था। - तब हुई मुगल दरबार में एक ब्रिटिश दूत की एंट्री।

साल 1615:

- थॉमस रो ब्रिटेन के किंग जेम्स प्रथम का राजदूत था, वो ईस्ट इंडिया कंपनी के हितों की रक्षा और भारत में व्यापार के लिए मौके की तलाश में आया था। - थॉमस रो को ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर ने खास तौर पर भारत के लिए चुना था। - उसे पहले ही 1605 में नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका था। - ब्रिटेन में लोग उसे सर थॉमस रो कहकर बुलाते थे, वो एक ख़ास रणनीति से भारत में आया था। इसलिए उसने जहांगीर को हर तरह से लुभाने की कोशिश की। - थॉमस रो के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुर्तगालियों से निपटने की थी। - भारत की रियासतों और यहां के व्यापारियों के बीच पुर्तगालियों की अच्छी पकड़ थी। - हिंदुस्तान के व्यापारियों के बीच भी अंग्रेज़ों की अच्छी इमेज नहीं थी। - थॉमस रो उस वक्त भारत के हालात अच्छी तरह से समझता था। - उसे पता था कि अगर यहां व्यापार करना है तो एक लिखित शाही फरमान हासिल करना बहुत ज़रूरी है। - इसके लिए वो एक बार फिर मुगल बादशाह जहांगीर के पास गया। - अकबर के समय से ही पुर्तगाली व्यापार कर रहे थे। - भारत के लोग न सिर्फ पुर्तगालियों से खुश थे, बल्कि वो उनके साथ अच्छे तालमेल से भी रह रहे थे। - यही बात अंग्रेज़ों को काफी अखर रही थी और तब थॉमस रो ने ईस्ट इंडिया कंपनी को एक लैटर लिखा। - थॉमस रो मुगल दरबार में भरोसा दिलाना शुरु किया कि अंग्रेज़ पुर्तगालियों से ज़्यादा ताक़तवर हैं। - वो न सिर्फ भारतीयों को ज़्यादा मुनाफे के साथ कारोबार कराएंगे बल्कि उन्हें सुरक्षा भी देंगे। - इसके बाद थॉमस रो ने 1615 से 1618 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए विशेष अधिकार हासिल कर लिए। - इसके फौरन बाद अहमदाबाद, बरहामपुर, आगरा और सूरत में फैक्ट्रियां खोल दी। - इसके साथ ही ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुसलीपट्टम और बंगाल की खाड़ी के पास अरमा गांव में भी कारखाने स्थापित कर दिए।