इस गांव में सिर्फ पैदा होते हैं आईएएस

जौनपुर (14 जनवरी): भले ही देश में मेट्रो शहरों में अग्रेजी माध्‍यम पढ़ाई को ही तव्‍वजों दी जा‍ती हो, लेकिन यह भी सच है कि देश को संभाल रहे प्रशासनिक अधिकारी आज भी गांवों से ही निकलते हैं। यूपी के जौनपुर जिले का एक गांव 'माधोपट्टी' उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो कहते हैं कि गांवों के मुकाबले शहरों में छात्रों की प्रतिभा को निखारने के अवसर ज्यादा आसानी से उपलब्ध है।

यह एक ऐसा गांव हैं जो आईएएस और आईपीएस की फैक्ट्री के रूप में जाना जाता है। इस गांव में महज 75 घर हैं लेकिन आज की तारीख में 'माधोपट्टी' से 47 आईएएस अधिकारी देश के अलग-अलग राज्यों में कार्यरत हैं। इस गांव का टैलेंट सिर्फ आईएएस या आईपीएस तक सीमित नहीं बल्कि इस गांव से होनहार लाल इसरो, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर और वर्ल्ड बैंक जैसी नामी संस्थाओं में अपनी प्रतिभा से चमक बिखेर रहे हैं।

गौरतलब है कि इसकी शुरुआत हुई अंग्रेजों के जमाने से जब देश के प्रख्यात शायर रहे वामिक जौनपुर के पिता मुस्तफा हुसैन साल 1914 में पीसीएस क्वालिफाई कर प्रशासनिक अधिकारी बने। इसके बाद 1952 में इंदु प्रकाश सिंह ने तो यहां के आने वाले पीढ़ी के लिए रोले मॉडल बनकर उभरे। इंदु प्रकाश सिंह आईएएस की एग्जाम में सेकंड रैंक हासिल कर इस गांव की तस्वीर ही बदल दी।